दूनिया की यंगेस्ट अरबपति एलेक्जेंड्रा एंडरसन हाल ही में अकेली भारत घूमने आईं और गुपचुप वापस भी चली गईं। बता दें कि नार्वे की 20 साल की एलेक्जेंड्रा दुनिया की यंगेस्ट अरबपति हैं। 

वो पिछले साल तब सुर्खियों में आई जब फोर्ब्स ने उसे 19 साल की उम्र में ही दुनिया की सबसे यंग अरबपति घोषित किया। लगातार दूसरे साल भी यह खिताब उन्हीं के नाम रहा।

तंबाकू और फाइनेंस बिजनेस से जुड़े उसके पिता जोहान एंडरसन ने पिछले साल अपनी कंपनी की अधिकांश हिस्सेदारी अपनी बेटियों एलेक्जेंड्रा और कैथरिना (21) के नाम कर दी।

इस साल एलेक्जेंड्रा की कुल प्रॉपर्टी करीब 10 हजार 895 करोड़ रुपए आंकी गई। इतनी ही प्रॉपर्टी उसकी बहन के नाम भी है। हालांकि कंपनी को अभी उनके पिता ही संभाल रहे हैं।

दुनिया घूमने की शौकीन एलेक्जेंड्रा एक बेहतरीन घुड़सवार हैं। घुड़सवारी की ड्रेसाज प्रतियोगिता में वह कई खिताब अपने नाम कर चुकी हैं। एलेक्जेंड्रा कई बार कह चुकी हैं कि वह हमेशा घोड़े पर ही बैठे रहना पसंद करती हैं।

एलेक्जेंड्रा ने एक बार कहा, 'मैं हमेशा अपने पैसा बचाने की जुगत में रहती हैं। घर से मिलने वाली पॉकेटमनी को भी मैंने हमेशा सहेज कर रखा। घुड़सवारी के दौरान मिली इनामी राशि के अलावा बर्थडे पर मिले गिफ्ट के रूप में मिली राशि को मैंने हमेशा बचा कर रखा। ताकि जरूरत पड़ने पर मैं अपने माता-पिता से पैसा मांगे बगैर अपनी जरूरत पूरी कर सकूं।'

एलेक्जेंड्रा ने हाल ही अपनी भारत यात्रा मुंबई से शुरू की। मुंबई भ्रमण के दौरान उसने वहां के कई युवाओं के साथ बातचीत की। उसकी नजर में मुंबई ओस्लो और बर्लिन के समान शहर है। मुंबई से एलेक्जेंड्रा राजस्थान यात्रा पर जोधपुर पहुंची। जयपुर रोड पर जोधपुर से चालीस किलोमीटर दूर स्थित चांदेलाव गढ़ में वे दो दिन रही। एलेक्जेंड्रा ने यहां महिला उत्थान से जुड़े एक एनजीओ के प्रोग्राम में भाग लिया। इसके तहत उन्होंने दो दिन स्थानीय महिलाओं के साथ रह उनके जीवन को करीब से समझने का प्रयास किया।

एलेक्जेंड्रा ने लिखा कि स्थानीय महिलाओं से मिला अनुभव मैं कभी नहीं भूल सकती। मेरी हमउम्र कई महिलाओं की शादी हो चुकी थी और उनके बड़े-बड़े बच्चे भी देख मुझे बेहद आश्चर्य हुआ। उनमें से अधिकांश अनपढ़ थी। दुनिया के दूसरे हिस्से की महिलाओं से मिलना वास्तव में आंखें खोलने वाला रहा।

इस दौरान उसने क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल की यात्रा की। बाद में उन्होंने महिलाओं को अपने सभी बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। गांव में रहने के दौरान वे पूरी तरह से मारवाड़ी परिवेश से जुड़ गई। स्थानीय महिलाओं से जुड़ने के लिए उन्होंने मारवाड़ी ड्रेस के साथ स्थानीय गहने भी पहने।

वहां पहनी मारवाड़ी ड्रेस की फोटो शेयर करते हुए एलेक्जेंड्रा ने लिखा कि बिन्दी के साथ नाक में बाली पहन हाथों में मेहंदी लगा मैं किसी प्रिंसेज से कम नजर नहीं आ रही थी। स्थानीय लोग मुझे कभी जैसलमेर की प्रिंसेज रही मूमल के नाम से बुला रहे थे। मेरा प्रिंसेज बनने का सपना यहां आकर पूरा हो गया। मिरर में स्वयं को इस ड्रेस में मैं पहचान ही नहीं पाई।

जोधपुर से एलेक्जेंड्रा जैसलमेर की यात्रा पर गई। दो दिन उन्होंने वहां रेतीले टीलों पर गुजारे। इस दौरान हमेशा घोड़े की सवारी करने वाली एलेक्जेंड्रा के लिए ऊंट की सवारी करना बेहद अलहदा अनुभव रहा। उन्होंने लिखा कि कुछ देर में ही मैने ऊंट को साध लिया।