महिलायें आज के बदलते दौर में पुरुषों के कंधे से कन्धा मिलाकर चल रही हैं। वे पुरुषों की तरह ही हर तरह का काम करने का हौसला रखती हैं, फिर चाहे वो कितना ही चुनौतीपूर्ण क्यों न हो। 

आज कई महिलायें ट्रक, बस, ऑटो आदि भी चलाती हैं। कैब चलाना हो या टैक्सी चलना महिलाओं के लिए कुछ भी असंभव नहीं है, हांलांकि टैक्सी चलाना भारतीय समाज में पुरषों का ही पेशा माना जाता है, अगर कोई महिला बतौर रोज़गार टेक्सी चलाते दिख जाए तो समाज में इसे एक अपवाद ही समझा जायेगा। 

लेकिन अब इस पेशे में भी महिलाओं के जाने की खबरें धीरे धीरे सुनने में आ रहीं हैं, हाल में ही महारास्ट्र में महिलाओं के आटो चालक का रोज़गार अपनाने की बात सामने आई थी, अब सिक्किम से कुछ ऐसी ही ख़बर आ रही है। सिक्किम की सात महिलाओं ने टैक्सी ड्राइविंग की शुरूवात की है।

सिक्किम की 7 महिला टैक्सी ड्राइवर्स को उनको खुद का टैक्सी स्टैंड दिलवाने में सिक्किम ट्रैफ़िक पुलिस ने बहुत मदद की। इन सातों महिला टैक्सी ड्राइवर्स के पास टैक्सी चलाने का लाइसेंस भी है। जब इन ड्राइवर्स को उनका टर्न-एलौटमेंट देने से टैक्सी एसोसिएशन ने इनकार कर दिया, तब वहां की ट्रैफ़िक पुलिस ने इनकी मदद की और इनको गंगटोक में टैक्सी स्टैंड के लिए जगह दिलवाई।

बेशक, ये महिलायें उनकी सहायता के लिए पुलिस की बहुत आभारी हैं। खुद के प्रति एक प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ा है इन महिलाओं को, इसीलिए ये महिलायें नहीं चाहती हैं कि आने वाले समय में किसी भी दूसरी महिला टैक्सी ड्राइवर्स को इस भेदभाव को न झेलना पड़े। वो सब कहती हैं कि हम हमेशा उन महिलाओं का उत्साहवर्धन करेंगे, जो ड्राइविंग को बतौर प्रोफ़ेशन अपनाना चाहती है।