मैसूर। महिला दिवस (Women's day) के अवसर पर आज हम आपको ऐसी महिला की कहानी बताने जा रहे हैं जो पिछले 17 सालों से कब्रिस्तान शवों को दफनाने का काम कर रही हैं। जी हां, यह महिला कर्नाटक के मैसूर में यह काम कर रही हैं। नीलम्मा (Nilamma) के नाम में फेमस यह महिला शवों को दफनाने का काम करके अपना जीवन यापन कर रही है। 

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धीरजवाली कब्रिस्तान (Dheerajwali Cemetery) में नीलम्मा पिछले 17 वर्षों से शवों को दफनाने का काम कर रही है। वह जिले के विद्यारण्यपुरम में वीरशिव रूद्र भूमि की निवासी है। आज महिला दिवस पर कई संगठनों ने नीलम्मा को इस नेक काम करने के लिए बधाई दी। नीलम्मा की एच.डी. कोट्टे से शादी होने के बाद वह उन्हीं के साथ कब्रिस्तान में रह रही थी। पहले उसका पति कब्रिस्तान में शवों को दफनाने का काम करता था। 

वर्ष 2005 में पति की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु होने के बाद नीलम्मा ने अपने पति के काम को संभाला। उनके कब्रिस्तान में काम करने और शवों को दफनाने के काम के बारे में किसी ने कुछ नहीं कहा। वह पिछले 17 साल से कब्रिस्तान परिसर में रह रही है और शवों को दफना रही है। उसने जब शवों को दफनाने का काम शुरू किया तो लोगों ने द$फनाने के लिए गड्डा खोदने के लिए 200 रुपये देने शुरू कर दिए।

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नीलम्मा ने बताया कि एक गड्डा खोदने के लिए उसे तीन से साढ़े तीन घंटे का समय लगता है। कभी-कभी उसका पुत्र भी इस काम में उसकी मदद करता है। नीलम्मा अभी 65 वर्ष की हैं,वह अपनी संतानों, पोतियों और पोते-पोतियों के साथ खुश हैं। नीलम्मा और उनकी संतानों ने मेडिकल कॉलेज को शरीर दान किया है। उन्होंने कहा कि मरने के बाद उसने अपना शरीर दान कर दिया जिससे मेडिकल के छात्रों को सीखने में मदद मिलेगी।