रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच एक अनोखा ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यहां पर पत्नियां और गर्लफ्रेंड अपने उन पतियों और ब्वॉयफ्रेंड्स को युद्ध के मैदान में भेज रही हैं, जो उन्हें छोड़ चुके हैं। यह महिलाएं रूसी अधिकारियों को बाकायदा इनका नाम-पता मुहैया करा रही हैं। यहां से अधिकारी इन व्यक्तियों को सेना में भर्ती कर ले रही है। ऐसा करने वाली महिलाओं में प्लेबॉय की पूर्व मॉडल दाना बोरिसोवा का नाम भी शामिल है। 

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असल में यूक्रेन के साथ गंभीर होते युद्ध के बीच पुतिन ने और सैनिकों की भर्ती के आदेश दिए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 300,000 नए सैनिकों को मोर्चे पर बुलाया जाएगा। इन सैनिकों के युद्ध में शहीद होने के बाद के इनके आश्रितों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। तमाम महिलाएं इस मौके को भुनाने की कोशिश में लगी हुई हैं। उनका तर्क है कि अब पूर्व पति या बॉयफ्रेंड उनके किसी काम तो आ नहीं रहे हैं। बेहतर हो कि वह देश के ही काम आ जाएं। जानकारी के मुताबिक इन सिपाहियों को सैलरी उनके अकाउंट में मिलेगी, जिसे वह अपनी पूर्व पत्नी से छुपा नहीं सकते। इतना ही नहीं, अगर वह युद्ध में मारे जाते हैं तो मिलने वाला पैसा उनके बच्चों को दिया जाएगा।

रूसी जांच शाखा वर्तस्का ने यह हैरान करने वाली जानकारी दी है। इसके मुताबिक सेना में भर्ती करने वाले ऑफिस को बड़ी संख्या में महिलाओं ने ऐसी जानकारी भेजी है। इस जानकारी में उनके पूर्व पतियों का नाम और पता है। यह ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपने पत्नी या गर्लफ्रेंड को छोड़ दिया है और अब उनका और उनके बच्चों का खर्च भी नहीं उठा रहे हैं। स्वेतलाना मिखाइलोवा एक फैक्ट्री में काम करती हैं। उन्होंने रूसी जांच शाखा से कहा कि मेरा पूर्व पति काफी मजबूत है। वह पहले भी सेना में काम कर चुका है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए उसे भर्ती किया जाना चाहिए न कि मेरे बेटे या मेरे वर्तमान पति को जो कि मेरा खर्च उठा रहा है।

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इस लिस्ट टीवी प्रजेंटर और प्लेबॉय मॉडल रह चुकी दाना बोरिसोवा का नाम भी शुमार है। बोरिसोवा का अपने पूर्व पति से कानूनी विवाद चल रहा है। ऐसे में उन्होंने रूसी अफसरों को उन्हें सेना शामिल किए जाने की रिक्वेस्ट भेजी है। बोरिसोवा ने कहा कि वह मुझे किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं करते हैं, जबकि वह मेरी बेटी के पिता हैं। मुझे लगता है कि यह बहुत ही अच्छा होगा कि अगर वह सेना में अपनी जिम्मेदारी उठाएं। वह अपनी बेटी की जिम्मेदारी नहीं उठा सकते तो कम से कम देश की जिम्मेदारी उठाएं।