एक शादीशुदा महिला के ऊपर चिट फेंककर प्यार का इजहार करना उसका अपमान है। यह बात बांबे हाई कोर्ट की नागपुर ब्रांच ने 2011 में अकोला में हुई एक घटना पर फैसला सुनाते हुए कही। कोर्ट ने कहा कि विनम्रता महिला का सबसे अनमोल गहना है। कोई भी ऐसा कृत्य जिससे महिला के स्वाभिमान को चोट पहुंचे उचित नहीं है। 

यह मामला एक दुकानदार से जुड़ा है, जिसने एक महिला से जबर्दस्ती प्यार का इजहार करना चाहा था। घटना तीन अक्टूबर 2011 को हुई थी। दुकानदार श्रीकृष्ण तवरी एक बर्तन धो रही महिला के पास पहुंचा और उसे चिट देनी चाही। महिला ने चिट लेने से इंकार कर दिया। इस पर दुकानदार ने चिट वहीं पर फेंक दी और महिला से कहा कि वह उससे प्यार करता है। अगले दिन उसने कुछ गलत इशारे किए और उसे चेतावनी दी कि वह चिट के बारे में किसी से न बताए। शिकायत के आधार पर दुकानदार के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। 

साल 2018 में सेशन कोर्ट ने दुकानदार को एक साल के लिए जेल की सजा सुनाई थी। साथ ही उसके ऊपर जुर्माना लगाते हुए कोर्ट ने तवरी से महिला को एक तय रकम बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया था। बाद में तवरी ने सेशन कोर्ट के इस फैसले को उच्च अदालत में यह कहते हुए चुनौती दी थी कि महिला ने उसके खिलाफ झूठा इल्जाम लगाया है। उसने कहा कि महिला ने उसकी दुकान से कुछ सामान उधार लिया था और उसका मन पैसे चुकाने का नहीं था। हालांकि जज ने कहा कि उनके सामने कोई ऐसी वजह नहीं है, जिससे वह सबूतों पर यकीन न करें।