अक्सर शादियों में बारातियों को 1 या 2 दिन वधू पक्ष के यहां ठहराकर खातिरदारी करने का रिवाज तो कुछ समय पहले कहीं दिख जाता है लेकिन लेकिन बदलते दौर और महंगाई के चलते यह चलन बंद हो चुका है। अब शादी की अगली सुबह ही वर वधू को लेकर बारातियों के साथ अपने घर लौट आते हैं। लेकिन कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन में मजबूरी में एक ऐसी बारात रूकी की रिकॉर्ड बन सकता है।
21 मार्च को कोलकाता से पटना मोहम्मद असलम की बारात आई थी जिसको 22 मार्च को ही पटना के राजेन्द्र नगर से हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन से वापस लौटना था। दूल्हा-दुल्हन के साथ बारातियों के कोलकाता लौटने का रिजर्वेशन भी था। 22 मार्च को शादी तो हुई, लेकिन लॉकडाउन की वजह से ट्रेन कैंसिल हो गई और दूल्हा-दुल्हन के साथ सारे बाराती पटना में ही फंस गये।
कोलकता के गार्डेन रीच के रहने वाले मोहम्मद असलम बारातियों के साथ 21 मार्च को पटना पहुंचे थे। लॉकडाउन की वजह से बारात के पटना में फंसने की वजह से लड़की के पिता के सामने लगभग 40 बारातियों के ठहरने, खाने पीने सहित कई सारे इंतजाम करने का संकट खड़ा हो गया। हालांकि सगे संबंधियों ने साथ दिया और 5-5 बारातीयों को अलग-अलग घर में रखा गया।

दुल्हन के पिता लगातार जिला प्रशासन से बारातियों को वापस भेजने का आग्रह करते रहे। आखिरकार जिला प्रशासन द्वारा इसका संज्ञान लेते हुए सभी बारातियों का पहले कोरोना स्क्रीनिंग कराया, फिर रास्ते के लिए खाना पीना का व्यवस्था करके उनको कोलकता भेजने के लिए एक बस भी उपलब्ध करा दिया।

बस में बैठे लोग कोलकात्ता के रहने वाले वे बाराती हैं जो लॉकडाउन की वजह से लड़के के ससुराल में पड़े हुए थे। अब घर वापसी के वक्त खुशी का इजहार करते हुए पटना जिला प्रशासन को ताली बजाकर सम्मान दे रहे हैं। इन बारातियों के बीच दुल्हा-दूल्हन भी बैठे दिखे और काफी खुश दिखे।

खुशी का कारण शादी होना नहीं, बल्कि 9 मई को 51 दिन बाद घर लौटने की खुशी थी। दुल्हा-दुल्हन भी इस यादगार शादी से थके-हारे स्थिति में भी खुशी का इजहार करते दिखे। वहीं लड़की के पिता भी प्रशासन को शुक्रिया कहा।