एक सशक्त महिला अपने जीवन में किसी कार्य को करने के दौरान राह में आने वाले आँधी-तूफान को चीरती हुई अपने सपनों को जीने का हुनर रखती है। कोई कितना ही रोके, कोई कितना ही टोके, सफलता के आयाम जो एक महिला अपने बलबूते पर गढ़ती है, उस पर कोई विराम नहीं लगा सकता। हाल ही में देश की तमाम महिलाओं के लिए ऐसी ही मिसाल बन खड़ी हुईं हैं राजस्थान के झुंझुनू के पोंख गाँव की ममता कुमारी। देश के लिए प्रेरणा बनीं ममता कुमारी स्वदेशी माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म, कू ऐप पर छा गई हैं। 

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जीवन के उतार-चढ़ाव के बीच किसी कारण से ममता की पढ़ाई बीच में ही रुक गई थी। ममता आगे पढ़ना चाहती थीं, लेकिन जिम्मेदारियों के चलते यह संभव नहीं हो सका। लेकिन कम शिक्षा की बेड़ियाँ ममता कुमारी को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने से नहीं रोक सकीं। वह पैरों में बँधी जंजीरों को तोड़कर आगे बढ़ना बखूबी जानती थीं। दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के माध्यम से उन्होंने फील्ड टेक्नीशियन का कोर्स किया। इसके माध्यम से वह आज सफलता की ऊँचाइयों को छू रही हैं। इतना ही नहीं वह 86,400 रुपये प्रति वर्ष कमाकर, आज खुशी-खुशी अपने पांच लोगों के परिवार का गर्व से खर्चा उठा रही हैं। 

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ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने आधिकारिक कू हैंडल के माध्यम से पोस्ट करते हुए अवगत कराया है:

शिक्षा छोड़ना ममता कुमारी को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने से नहीं रोक सका। झुंझुनू के पोंख गाँव से #Rajasthan #DDUGKY के फील्ड टेक्नीशियन कोर्स ने उन्हें सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचने में मदद की। 86,400 रूपए प्रति वर्ष कमाकर, आज वे खुशी-खुशी 5 लोगों के परिवार का समर्थन कर रही हैं।

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आज ममता कुमारी देश की उन तमाम महिलाओं के लिए मिसाल और प्रेरणा बन चुकी हैं, जो अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं, किसी और पर निर्भर होने के बजाए खुद के पैरों पर खड़े होना चाहती हैं, बदलती दुनिया के अनुरूप खुद को ढालना चाहती हैं, अपने सपनों को जीना चाहती हैं, अपनी इच्छा परिवार के सामने प्रकट करना चाहती हैं, लेकिन समाज के दबावों और अन्य परेशानियों के चलते खुद को पीछे खींच लेती हैं। उन सभी महिलाओं को ममता कुमारी ने यह बताया है कि दबाव आपको कभी नहीं रोक सकता, आप वह सब कर सकती हैं, जो आप असल में करना चाहती हैं।