कहते हैं कि जब सपनों को पूरा करने की चाह हो तो आपकी उड़ान को कोई नहीं रोक सकता, असम की इस लड़की की कहानी कुछ ऐसा ही बयां कर रही है। हम बात कर रहे हैं गुवाहाटी की 19 वर्षीय लड़की पिंचि गोगोई की, जिन्होंने हाथ ना होने के बावजूद भी एक मिसाल कायम की है।


पिंचि का जन्म ही बिना हाथों के हुआ था, लेकिन इस शारीरिक कमजोरी को उसने कभी भी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया और ना ही इस कमी को अपने ऊपर कभी हावी होने दिया। उन्होंने अपनी इस शारीरिक कमजोरी को ताकत बना लिया और आज गुवाहाटी में नेमेकेर सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में 'मे आई हेल्प यू' डेस्क यानि की सहायता केंद्र की प्रभारी हैं।


पिंचि सहायता केंद्र पर मरीजों को अस्पताल और बीमारी से जुड़ी जानकारियां प्रदान करती हैं, उन्होंने बताया कि वह अपने रोजआना के कार्यों को जैसे मरीज का विवरण लिखना, कॉल करना , अन्य आधिकारिक व लिखा पढ़ी का काम करने के लिए अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं। 


आज पिंचि की इस कामयाबी को देखकर परिवार के साथ- साथ अन्य लोगों को गर्व महसूस होता है, लेकिन पिंचि को ये सफर इतना असान नहीं था, उन्हें शुरुआत में स्कूलों में दाखिला नहीं मिला था, हाथ ना होने के कारण स्कूलों ने उन्हें एडमिशन देने से मना कर दिया। बाद में उनके एक रिश्तेदार की मदद से उन्हें एक स्कूल में दाखिला मिल गया, लेकिन इसके बाद भी उसका संघर्ष खत्म नहीं हुआ, उच्च शिक्षा के लिए उन्हें गुवाहाटी में भी दखिला पाने में भी काफी मुश्किल सामना करना पड़ा, लेकिन इस संघर्ष के समय में उनकी मां ने उनका साथ नहीं छोड़ा। 


गुवाहाटी के नेमेकेयर अस्पताल के प्रबंध निदेशक, हितेश बारुआ ने मीडिया से बताया कि, "शारीरिक रूप से असक्षम होने के बावजूद भी, पिंचि अपना काम बखूबी करती हैं, वह नेमेकेर सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में हेल्प डेस्क पर प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं।" अस्पताल में काम करने के आलावा भी पिंचि अपने पैरों से कमाल की पेंटिंग भी करती हैं, जिसे देखकर शायद ही किसी को यकीन हो की वह ऐसा अपने हाथों से नहीं बल्कि पैरों से करती हैं।