'जब बच्चे छोटे होते हैं, तो उन्हें जल्दी-जल्दी भूख लगती है। इसलिए मैं और मेरे पति सालों से शिफ्ट्स में सो रहे हैं। हम कहीं बाहर नहीं गए, क्योंकि पीछे से हमारे बच्चे को कौन रखता। लेकिन फिर भी हम खुश थे अपने बच्चे को बड़ा होता देख। हालांकि हमारा बच्चा दूसरों से कुछ अलग है। दरअसल, वो इंसान नहीं चीता है।' यह कहना है लंदन के कैट निवासी दंपति विक्टोरिया एस्पिनॉल का।


विक्टोरिया और उनके पति डेमियन लंबे समय से जानवरों के लिए काम कर रहे हैं। विक्टोरिया का कहना है कि हमने कई जानवरों का ध्यान रखा जिनमें गोरिल्ला, गेंडा सहित कई जानवर शामिल है, लेकिन चीते रखने का अनुभव हमें ढाई साल पहले ही हुआ है, जब हमने सबा को गोद लिया। लेकिन अब सबा बड़ा हो गया है और उसे पूरा हक है कि वो अपने घर में रहे, जंगल में रहे। इसलिए उसे दक्षिण अफ्रीका के एक वन्यजीव रिजर्व में स्वतंत्र छोड़ा जा रहा है, जिससे वो अपनी जिंदगी अन्य जानवरों की तरह जी सके।


सबा का जन्म करीब ढाई साल पहले कैंट स्थित पोर्ट लिम्पेन रिजर्व में हुआ। उसके आधे बहन-भाई मर चुके थे और जो बचे थे उनमें से सबा बेहद कमजोर था। उसे गोद लेने के अलावा हमें कोई दूसरा विकल्प नहीं दिखा। हम सबा को घर ले आए। उसे पाला, वो हमारे परिवार का एक हिस्सा है। विक्टोरिया कहती हैं कि लेकिन आगे की जिंदगी के लिए हमें उससे दूर जाना ही होगा।