सर्दियों का मौसम में लोग ठंड से बचने के लिए स्वेटर, जैकेट, कंबल और रजाई से अपने आप को बचाते हैं। यही नहीं सर्दियों में ठंड से बचने के लिए लोग कई तरह के तरीके अपनाते हैं। इसी तरह से सर्दी जुकाम जैसी बीमारियों से बचने के लिए ड्राई फ्रूट्स खाते हैं। लेकिन इससे भी खतरनाक नुक्सा लोग अपनाते हैं जिसमें जंगलों में रहने वाले आदिवासी इतनी ठंड में भी ना तो अच्छे स्वेटर पहन पाते हैं और ना ही जैकेट। इसलिए यह आदिवासियों को अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए खास तरह का जुगाड़ करते है।


झारखंड में रहने वाले आदिवासी समुदायी के लोग सर्दी में अपनी एक परंपरा को अपनाते हैं।  जैसे कि हम जानते हैं कि आदिवासियों की जिंदगी दुनिया के अन्य लोगों की तुलना में अलग होती है। इसी तरह से सर्दियों में ठंड से बचने के लिए यह लोग पेड़ों पर पाई जाने वाली लाल रंग की चींटी की चटनी खाते हैं। अब चींटियों की चटनी कोई कैसे खा सकता है। वैसे इंसान ने किसी भी जानवर का खाने में पीछे नहीं हटाता है। आम इंसान को प्याज, टमाटर या धनिया मिर्च की चटनी खाते है वैसे ही आदिवासी चींटी की चटनी खाते हैं।


 आदिवासियों का कहना है कि ठंड के दिनों में अगर चींटी की चटनी खाई जाए तो ठंड भी नहीं लगती और भूख भी अच्छी तरह से लगती है। वैज्ञानिकों ने कहा कि लाल चींटियों में टेटर‍कि एसिड पाया जाता है, जो शरीर के लिए काफी लाभदायक होता है। झारखंड के आदिवासी लोगों का कहना है कि ठंड पड़ते ही यहां के साल और करंज के पेड़ों पर लाल चींटी अपना घर बनाती हैं जिससे कि पेड़ के पत्तों पर चींटियों का ढेरा होता है और आदिवासी उनको खाने में इस्तेमाल करते हैं। लाल चींटियों की चटनी बनाने के लिए आदिवासी नमक, मिर्च, अदरक, लहसुन मिलाकर काफी बारीक तरीके से पीसते हैं।