संयुक्त राष्ट्र के इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) की रिपोर्ट में धरती के बढ़ते तापमान को मानवता के लिए ‘कोड रेड’ करार दिया गया है. रिपोर्ट में कहा है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के जिन खतरों के भविष्य में आने की आशंका थी, वे वक्त से पहले दिखने लगे हैं. इनकी भरपाई मुमकिन नहीं है.

वैज्ञानिकों ने कहा है कि अगर हम कार्रवाई करने में विफल रहते हैं, तो जलवायु में देखे गए कई बदलाव हमारे भविष्य को तबाह कर देंगे. फिर इंसान के पास धरती पर भाग कर बचने की जगह भी नहीं मिलेगी.

रिपोर्ट की बड़ी बातें-

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हर 50 साल में एक बार आने वाली हीट वेव (भीषण गर्मी) अब हर 10 साल में आने लगी है. साथ ही हर दशक में भारी बारिश और सूखा पड़ने लगा है.

IPCC की रिपोर्ट के मुताबिक 60 देशों के 200 से ज्यादा लेखकों ने पांच स्थितियों को देखते हुए निष्कर्ष निकाला है कि अगले 20 साल में ग्लोबल टेम्परेचर 1.5 डिग्री तक बढ़ जाएगा.

IPCC की रिपोर्ट कहती है कि पूर्व औद्योगिक समय से हुई लगभग पूरी तापमान वृद्धि कार्बन डाई ऑक्साइड और मीथेन जैसी ऊष्मा को अवशोषित करने वाली गैसों के उत्सर्जन से हुई.

रिपोर्ट 3000 पन्नों से ज्यादा की है और इसे 234 वैज्ञानिकों ने तैयार किया है. इसमें कहा गया है कि तापमान से समुद्र स्तर बढ़ रहा है, बर्फ का दायरा सिकुड़ रहा है और प्रचंड लू, सूखा, बाढ़ और तूफान की घटनाएं बढ़ रही हैं.

आईपीसीसी को कुछ हौसला बढ़ाने वाले संकेत भी मिले हैं, जैसे - विनाशकारी बर्फ की चादर के ढहने और समुद्र के बहाव में अचानक कमी जैसी घटनाओं की कम संभावना है. हालांकि, इन्हें पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता.