नागालैंड की राजधानी से कोहिमा से 380 किमी की दूरी पर नार्थ-ईस्ट की तरफ स्थित लोंगवा गांव, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण फेमस है। खूबसूरती के साथ इस गांव की एक और खासियत हैं जो इसे दुनिया के आैर गांवों से अलग करती हैं। इस गांव के लोगों को दो देशों की नागरिकता प्राप्त हैं।

देश का अनोखा गांव, यहां के लोगों को मिलती है दो देशों की नागरिकता
जी हां, लोंगवा भारत की पूर्वी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बसा हुआ हैं। यह गांव इसलिए भी ख़ास हैं क्योंकि इस गांव के बीचो-बीच भारत और म्यांमार की सीमा गुजरती हैं। जिस कारण से इस गांव के लोगों को दो देशों की नागरिकता मिली हुर्इ हैं। नागालैंड पूर्वोत्तर भारत के सेवन सिस्टर्स के नाम से जाने वाले 7 राज्यों में से एक हैं जो 11 जिलों से मिलकर बना हैं। उनमें से मोन जिला राज्य के उत्तरी भाग में स्थित हैं। मोन जिले के बड़े गावों में से एक गांव लोंगवा हैं।


आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भारत और म्यांमार के बीच बसे इस गांव का आधा भाग भारत और आधा भाग म्यांमार में पड़ता हैं। इस गांव के बीचो-बीच गुजरने वाली अंतर्राष्ट्रीय सीमा के बावजूद इस गांव के लोगों को दो देशों की सीमाओं में न बांटते हुए दोनों देशों की नागरिकता दी गई हैं। साल 2011 में हुई जनगणना के अनुसार, इस गांव में 732 परिवार रहते हैं जिनकी जनसंख्या 5132 हैं।


यहां कोनियक नागा जनजाति के लोग रहते हैं जो यहां कि 16 जनजातियों में से सबसे बड़ी हैं। एक समय था जब यहाँ कि कोनियक नागा जनजाति के लोग हेड हंटिंग (सर काटकर हत्या) के लिए मशहूर थे। इस जनजाति के मुखिया को अंग कहा जाता हैं। इस जनजाति का अंग आसपास के 75 गाँवों पर राज करता हैं। यानी अंग का शासन म्यांमार से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ हैं।