इंग्लैंड के एक स्कूल ने अजीबोगरीब नियम बनाते हुए अपने स्कूल के बच्चों के लिए ये नियम बनाया है कि अगर उन्हें क्लास के बीच में टॉयलेट जाना तो उसके लिए उन्हें डॉक्टर से लिखा नोट लाना पड़ेगा। इस नियम के बारे में जानकर एक बच्ची की मां भड़क गई है।

हर स्कूल के अपने अलग-अलग नियम होते हैं जिसे बच्चों को मानना पड़ता है। आमतौर पर ये नियम बच्चों में अनुशासन की भावना पैदा करने के लिए बनाए जाते हैं मगर कई बार स्कूल प्रशासन ऐसे नियम बना देता है जो इतने अजीबोगरीब होते हैं जिससे बच्चों को परेशानी होने लगती है। इंग्लैंड के एक स्कूल ने ऐसा ही एक नियम बनाया जिसके बारे में जानकर एक छात्रा की मां आग बबूला हो गईं और अब वो स्कूल के खिलाफ सख्त कदम उठाने का सोच रही हैं।

इंग्लैंड के बुलवेल अकैडमी स्कूल में एक 14 साल की बच्ची पढ़ती है जो फिलहाल 10वीं कक्षा में है। बच्ची की मां स्कूल के बनाए एक नियम से बेहद परेशान हैं और इस वजह से उन्होंने स्कूल को मिलिट्री शासन वाला स्कूल और बेकार स्कूल बता दिया है। दरअसल, इस स्कूल ने बच्चों पर अपना नियम थोपते हुए उन्हें स्कूल में टॉयलेट जाने के लिए डॉक्टर से प्रिस्क्रिप्शनलाने के लिए कहा है। 

स्कूल ने बच्चों से कहा कि अगर उन्हें लंच ब्रेक के पहले या बाद में टॉयलेटजाना है तो उन्हें डॉक्टर से लिखा पर्चा लाना पड़ेगा। जब से छात्रा की मां को इस बारे में पता चला है तब से ही वो स्कूल के इस नियम से बेहद नाराज हैं। डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि स्कूल द्वारा बनाया गया ये नियम लड़कियों के लिए बेहद अपमानजनक है।

मां ने, नाम न बताने के अनुरोध पर, कहा- “स्कूल में बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह गलत है।” मां ने बताया कि सिर्फ उनकी ही बेटी को नहीं बल्कि अन्य माता-पिता के बच्चों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। कई लोगों को डॉक्टर से प्रिस्क्रिप्शन लिखवाकर लाने में हजार रुपये तक देने पड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को महावरी के वक्त काफी ज्यादा ब्लीडिंग होती है जिसके कारण उसे पीरियड्स के दिनों में क्लास के बीच में भी टॉयलेट जाना पड़ जाता है। मगर उसके लिए उसे नोट लिखवाकर ले जाने को कहा है। मां ने बताया कि एक बार वो पहले नोट लिखवाकर ले जा चुकी है मगर स्कूल प्रशासन का कहना है कि हर महीने बच्ची को नया नोट डॉक्टर से लिखवाकर लाना पड़ेगा। एक बार तो मां को डॉक्टर से नोट लिखवाने के लिए 3 हजार रुपये तक देने पड़े थे।