दुनिया में कई तरह की जनजातियां है। सभी जनजातियों की अपनी एक पहचान होती है। इसी तरह से  पश्चिमी म्यांमार में एक चिन राज्य में रहने वाली लाई तू चिन जनजाति (Lai Tu Chin tribe) है। ये बहुत ही अलग तरह की जनजाती है।  क्योंकि इनकी पहचान इनके टैटू होते हैं। ये लोग सदियों से टैटू बनाते आ रहे हैं।  


लाई तू चिन जनजाति (Lai Tu Chin tribe) के बारे में, यहां टैटू सुरक्षित रहने का एक जरिया था। स्थानीय लोगों के मुताबिक बताया गया है कि एक बार यहां बर्मा का राजा आया था, उस समय उसे यहां की महिलाएं बेहद आकर्षक लगती थी और यही कारण था जिससे वह महिला को अपनी रानी बनाने के लिए अगवा कर लिया करता था।
इस घटना को देखने के बाद चिन जनजाति के लो से चिन लोग डर गए और उन्होंने अपनी बेटियों के चेहरे पर टैटू (tattoos) गुदवा दिया और तब से ये प्रथा शुरू हो गई है. इस टैटू (tattoos) को लेकर एक दूसरी मान्यता यह भी है कि यहां की औरते अपने चेहरे पर टैटू इसलिए भी बनवा लेते है जिससे वो खूबसूरत लगें और इलाके की दूसरी जनजातियों से अलग नजर आएं।
चेहरे पर टैटू बनवाने का एक कारण धर्म से भी जुड़ा है, कहा जाता है कि ब्रिटिश साम्राज्य स्थापित होने के बाद चिन अल्पसंख्यकों को ईसाई (Christians) बनाया गयाष जिसके बाद उन लोगों को भरोसा दिलाया गया कि उन्हीं ईसाइयों को जन्नत नसीब होगी जिनके चेहरे पर टैटू (tattoos) बना होगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोशलिस्ट सरकार ने 1960 के दशक में इसको अमानवीय घोषित कर पूरी तरीके से बैन लगा दिया है।