वैज्ञानिकों ने धरती को लेकर ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान है। इनका दावा है कि धरती की अपनी बुद्धि है। उसका अपना दिमाग और बुद्धिमत्ता है। वह एक इंटेलिजेंट ग्रह है। इसका मतलब धरती जीवित है। यह स्टडी हाल ही में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एस्ट्रोबायोलॉजी में प्रकाशित हुई है। जिसमें ग्रहीय बुद्धिमत्ता  की बात कही गई है। इसमें ग्रह के पूरे ज्ञान और तार्किक क्षमता की चर्चा की गई है।

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सबूत के तौर पर साइंटिस्ट्स ने कहा है कि जमीन के नीचे फंगस की एक विशालकाय परत है। यह पूरी धरती में फैली हुई है। ये आपस में संदेशों का आदान-प्रदान करती हैं। इनका एक बड़ा नेटवर्क है। यह एक अदृश्य बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करती हैं। जिसकी वजह से पूरी धरती की स्थितियां बदलती रहती हैं। अगर इस तरह की प्रक्रियाओं को पकड़कर उनकी जांच की जाए तो हम जलवायु परिवर्तन, वैश्विक गर्मी जैसी घटनाओं पर धरती की प्रतिक्रया को समझ सकते हैं।


पृथ्वी पर शुरुआती जीवन यानी फंगस जैसे जीवों से लेकर इंसानों जैसे जटिल जीव मौजूद हैं। इंसानों द्वारा निर्मित पर्यावरण प्रदूषण से लेकर प्लास्टिक संकट तक की गवाह रही है धरती। वह लगातार किसी न किसी तरीके से संतुलन बनाने के लिए किसी न किसी तरह की प्रक्रियाओं को जन्म देती रहती है। अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर में फिजिक्स के प्रोफेसर एडम फ्रैंक ने कहा कि इंसान अभी तक धरती की भलाई के लिए सामुदायिक स्तर पर नहीं जुट पाया है। जैसे वह त्योहारों के लिए साथ आता है अथवा बीमारियों के खिलाफ होता है।

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उदाहरण के लिए बताया गया है कि मान लीजिए पेड़-पौधे एक समुदाय हैं। उन्होंने खुद को जीवित रखने के लिए वैश्विक स्तर पर एक प्रक्रिया शुरू की। जिसे फोटोसिंथेसिस कहते हैं। प्रक्रिया सामुदायिक स्तर पर पूरी धरती पर हो रही है। बदले में क्या मिला...Oxygen। बस फिर क्या था। ऑक्सीजन ने हमारी धरती की पूरी प्रक्रिया को ही बदल दिया। असल में पेड़-पौधे काम तो अपने लिए कर रहे हैं, लेकिन वो धरती की बुद्धिमत्ता का एक हिस्सा हैं।