इस दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां के लोग शराब में सोना घोलकर पीते हैं। इतना ही नहीं बल्कि यहां की लड़कियां सोने का फेस मास्क लगाती हैं। यह देश कोई और नहीं बल्कि हमारा पड़ौसी म्यांमार है। इस देश को ‘स्‍वर्णभूमि’ यानी ‘गोल्‍डन लैंड’ के तौर पर भी जाना जाता है। इस देश के कुछ शहरों जैसे मंडालय और यंगून के ऊपर से जब आप गुजरेंगे तो आपको इस बात की वजह भी पता लग जाएगी। सोने के चमकते स्‍तूप और पगोड़ा आपको हर तरफ दिखाई देंगे। फिर चाहे वो शहरों की बिजी सड़के हों या फिर गांव के शांत इलाके। म्‍यांमार में सोना इतना पवित्र है कि आप इसका प्रयोग पारंपरिक दवाईयों से लेकर फेस क्रीम और कभी -कभी शराब से लेकर खाने-पीने की चीजों में भी देख सकते हैं।

देश के छोटे-छोटे मंदिर पुराने पेड़ों के नीचे या लोगों के घरों के सामने बने दिखते हैं। आपको यहां पर हर तरफ सोना ही सोना नजर आता है। मांडले के आस-पास की पहाड़ियों पर ही सात सौ से ज्‍यादा सोने के मंदिर हैं। बगान नाम के शहर के इर्द-गिर्द तो 2200 से ज्‍यादा मंदिरों और पगोड़ा के खंडहर बिखरे हुए नजर आ जाएंगे। 11वीं से 13वीं सदी के बीच पगान साम्राज्य के दौर में यहां दस हजार से ज्‍यादा मंदिर हुआ करते थे।

इसी दौर में बौद्ध धर्म का विस्तार पूरे म्यांमार में हो रहा था। हालांकि बौद्ध धर्म ने देश की धरती पर दो हजार साल पहले ही कदम रख दिए थे। यहां अभी भी परंपरागत तरीकेसे ही सोने को तरह-तरह के रंग-रूप में ढाला जाता है। इस बात का खास ख्‍याल रखा जाता है कि सोना पूरी तरह से शुद्ध है यानी 24 कैरेट है। बांस की पत्तियों के बीच में सोने को रखकर सौ से दो सौ परतें तैयार की जाती हैं। फिर इन्हें ढाई किलो के हथौड़ों से करीब 6 घंटे तक पीटा जाता है ताकि ये सही आकार ले सकें।

फिर इन्हें पतले-छोटे एक एक इंच के टुकड़ों में काटा जाता है। सोने की ये पत्तियां मंदिरों में चढ़ाई जाती हैं। सोने का इस्तेमाल परंपरागत दवाओं में भी होता है। यही नहीं, यहां की स्थानीय शराब में भी सोने के ये पत्तर डाले जाते हैं। स्थानीय शराब को व्हाइट व्हिस्की के नाम से जानते हैं। इनकी बोतलों में सोने के पतले से पत्तर में डाल कर हिलाया जाता है। फिर इस सोने मिली शराब को गिलास में डालकर लोग उसका लुत्‍फ लेते हैं।

म्यांमार में सोने को बहुत पवित्र माना जाता है। यहां की 90 फीसदी आबादी बौद्ध है। बौद्ध धर्म में सोने को बहुत अहमियत दी जाती है। इस धर्म में सोने को सूरज का प्रतीक माना जाता है और सूरज ज्ञान और बुद्धि की नुमाइंदगी करता है। देश के लोग मंदिरों को सोने से सजाकर बुद्ध को अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं कई खास मौकों पर पर बनने वाले चावल और सब्जियों में भी सोने के टुकड़े डाले जाते हैं। लड़कियां सोने से श्रृंगार तो करती ही हैं साथ ही साथ केले और सोने के बने हुए फेस मास्क से चेहरे भी चमकाती हैं। माना ये जाता है कि सोना त्वचा के अंदर जाता है तो उससे मुस्कान बेहतर होती है।