द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हिटलर का 28 टन सोना पोलैंड के एक महल में छिपा हुआ है। हिटलर की सेना में शामिल एक सैनिक की डायरी से इस बात का खुलासा हुआ है कि उन्होंने रूसी सेना से बचाने के लिए खजाने को महल में छिपा दिया था।

 माना जाता है कि पोलैंड के व्रोकला शहर के पास स्थित होचबर्ग पैलेस के मैदान में एक कुएं के शॉफ्ट के नीचे सोने की छड़ें, सिक्के और ज्वैलरी जमीन के 200 फीट नीचे दबाकर रखी गई हैं।

पोलिश-जर्मन सिलेसियन ब्रिज फाउंडेशन के रिसर्चर्स ने दावा किया है कि उन्हें हिटलर के निजी सेना के एक सिपाही की डायरी मिली है जिसमें लिखा है कि इस खजाने को द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार के आशंका के कारण यहां दफना दिया गया था।

कहा जाता है कि इस खजाने को पोलैंड के तत्कालीन शहर ब्रेस्लाउ (वर्तमान में व्रोकला) के रीचबैंक में जमा करना था लेकिन ऐसा हो न सका।

यह भी कहा जाता है कि 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के समय स्थानी धनवान लोगों ने अपने कीमती सामानों को रूस की रेड आर्मी से सुरक्षित रखने के लिए जर्मनी की एसएस सैनिकों को सौंप दिया था। अगर यह दावा सही है तो वर्तमान में इस खजाने का मूल्य 1.25 बिलियन यूरो से ज्यादा हो सकता है।

इस जगह का पता लगाने वाले पोलिश-जर्मन सिलेसियन ब्रिज फाउंडेशन के प्रमुख रोमन फुरमानी ने कहा कि वह जांच के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए अपने रिसर्च को सार्वजनिक कर रहे हैं। उनका दावा है कि हिटलर के जिस सैनिक की डायरी उन्हें मिली है उसे जर्मनी में भी प्रमाणित किया गया है। उन्होंने पोलैंड के संस्कृति मंत्रालय से भी इस डायरी की सत्यता के बारे में संपर्क किया लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला है।

फुरमानी ने कहा कि बिना सरकारी अनुमति और वित्तपोषण के ऐसा करना हमारे लिए कठिन साबित हो रहा है। वर्तमान में इस महल के मालिकों ने इन्हें एक निश्चित सीमा में खुदाई करने की अनुमति दे दी है। इसके लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।