भारत और ब्रिटेन समेत दुनिया के तमाम देशों में भले ही बिटकॉइन पूरी तरह से वैध मुद्रा नहीं हो, लेकिन एक मस्जिद ने चंदे के रूप में बिटकॉइन को स्वीकार करके दुनिया को चौंका दिया।


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन स्थित इस मस्जिद को दुनिया की पहली मस्जिद माना जा रहा है जिसने बिटकॉइन के रूप में चंदा लेने को मान्यता दी। खास बात यह कि ब्रिटेन में बिटकॉइन के लेनदेन पर अभी पाबंदी है। गौरतलब है कि एक महीने पहले ही इस्लामिक विद्वानों ने शरिया कानून के तहत क्रिप्टोकरेंसी के जरिए लेनदेन को जायज ठहराया था।


इसके बाद ही हैकनी स्थित ‘शैकेलवेल लेन मस्जिद’ की ओर से एलान किया गया था कि रमजान के महीने के दौरान चंदे के रूप में क्रिप्टोकरेंसी को स्वीकार किया जाएगा। मस्जिद ने यह उम्मीद भी जताई थी कि रमजान में उसे बिटकॉइन या एथेरियम के जरिए 10 हजार ब्रिटिश पौंड के मूल्य के बराबर की क्रिप्टोकरेंसी मिल सकती है।


हालांकि मस्जिद की ओर से इस्तेमाल किए गए ‘बिटकॉइन बटुआ’ के एड्रेस पर अब तक केवल एक ही व्यक्ति ने चंदा दिया है जिसका मूल्य 100 पाउंड के बराबर है। मुस्लिमों से कहा जाता है कि वह अपनी पूरी संपत्ति का 2.5 फीसदी हिस्सा जकात के रूप में रमजान के दौरान दान करें। मस्जिद न्यास बोर्ड के चेयरमैन एरकिन गनी ने कहा, ‘हम नई मुद्रा को लेकर ज्यादा से ज्यादा लोगों से अपील करना चाहते हैं।


यह इस्लामिक दुनिया के लिहाज से बहुत बड़ा कदम है। हमने अपने समुदाय से बाहर के धनी मुस्लिमों के लिए एक प्लेटफॉर्म तैयार किया है ताकि वह हमारे मस्जिद को चंदा देकर मदद कर सकें।’ इंडोनेशिया स्थित ब्लॉसम फाइनेंस के मोहम्मद अबु बकर ने पिछले महीने बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी की क्रियाविधि को लेकर अध्ययन कर यह जानने का प्रयास किया था कि क्या ये मुद्राएं इस्लाम की दृष्टि से जायज हैं।


खासकर इस बारे में परस्पर विरोधी फतवों के कारण उत्पन्न भ्रम की स्थिति के कारण यह अध्ययन किया गया। इसके मद्देनजर किए गए इस अध्ययन में यह निष्कर्ष दिया गया कि सैद्धांतिक रूप से बिटकॉइन  का चलन जायज है जिसे वैश्विक स्तर पर अनेक तरह के कारोबारियों की ओर से स्वीकार किया जाता है। 


बिटकॉइन एक अंतरराष्ट्रीय आभासी मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) है। यह एक डिजिटल मुद्रा है जिसे आप न तो देख सकते हैं और न ही छू सकते हैं। यह मुद्रा किसी एक देश या सरकार की नहीं होती। कुछ देश और ऑनलॉइन पोर्टल इसे स्वीकार कर रहे हैं, तो चीन, भारत, ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों में इसके लेनदेन पर पाबंदी है। दरअसल बिटकॉइन का लेनदेन बिना बैंक के होता है। बिटकॉइन किसी कानून के दायरे में नहीं है। पैसे देकर इसको खरीदा जा सकता है। इस मुद्रा का आविष्कार सातोशी नकामोतो नामक एक अभियंता ने 2008 में किया था।


बिटकॉइन समेत अन्य आभासी मुद्राओं का इस्तेमाल कहीं भी आसानी से किया जा सकता है। इस लेनदेन पर नजर रखना किसी भी सरकार के लिए काफी मुश्किल काम है। इसके कारण इससे गैरकानूनी खरीद बिक्री को बढ़ावा मिलने की आशंका रहती है। इसके दाम में बेलगाम उतार-चढ़ाव का दिखना भी चिंता का विषय है। बिटकॉइन का सौदा किसने किससे किया, यह पता लगा पाना मुश्किल है।


माइननिंग का मतलब सोना, कोयला आदि के खनन से होता है। लेकिन बिटकॉइन का कोई  भौतिक रूप नहीं होता इसलिए इसकी माइनिंग का मतलब इसके निर्माण से होता है। बिटकॉइन को कंप्यूटर पर बनाना ही ‘बिटकॉइन माइनिंग’ है। बिटकॉइन माइनिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कंप्यूटिंग पावर का इस्तेमाल किया जाता है। माइनिंग का काम वही लोग करते हैं जो जिनके पास विशेष गणना वाले कंप्यूटर और गणना करने की उचित क्षमता हो।


इसके खिलाफ भारत सरकार
भारत में बिटकॉइन को लेकर आतंकी फंडिंग की बात सामने आने लगी है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद भारत सरकार भी बिटकॉइन के खिलाफ है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बिटकॉइन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा चुका है। हालांकि आरबीआई के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।