दुनिया हर चीज अद्भुत है। ईश्वर में इतने नायाब तरीके से इस धरती को बनाया है कि इंसान कितनी है साइंस में तरक्की कर लें लेकिन ऐसी धरती जैसी कोई और सजीव नहीं बना सकता। इसी तरह के कई चीजों को लेकर मन में सवाल आते हैं कि इंसान इतना बुद्धिमान क्यों जानवर क्यों नहीं लेकिन अभी तो इंसान जानवर ही बन रहा है खैर, हम बात करते हैं कि घास सिर्फ हरे रंग की ही क्यों होती है, लाल पीली नीली क्यों नहीं होती।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साइंस कहता है कि घास हरे पिगमेंट 'क्लोरोफिल' की वजह से हरी होती है। क्लोरोफिल के साथ-साथ घास के हरे रंग के लिए, ऑर्गेनेल नाम के सेलुलर कंपोनेंट और सूरज की रोशनी से भोजन बनाने की प्रक्रिया- फोटोसिंथेसिस भी अहम भूमिका निभाते हैं।
छोटे-छोटे ऑर्गेनेल में क्लोरोप्लास्ट होते हैं, जो क्लोरोफिल के अणु होते हैं। क्लोरोफिल के अणु के सेंटर में एक मैग्नीशियम आयन होता है, जो एक पोर्फिरिन से जुड़ा होता है। Porphyrin एक बड़ा ऑर्गैनिक नाइट्रोजन अणु होता है।

यह भी पढ़ें- मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने ड्रग गिरोह को दी Warning, थरथर कांपे माफिया

क्लोरोफिल के अणु रोशनी-
क्लोरोफिल ग्रीक शब्द क्लोरस (Chloros) से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है पीला-हरा। क्लोरोफिल के अणु रोशनी से कुछ तरंग दैर्ध्य (Wavelengths) को अवशोषित करता है, खासकर लाल और नीला। लाल लंबी वेवलेंथ होती है, जबकि नीली छोटी। इलेक्ट्रो मैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का हरा क्षेत्र अवशोषित नहीं होता, बल्कि वह हमारी आंखों में रिफ्लेक्ट होता है। इसी वजह से हरी दिखाई देती है घास।



क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण यानी फोटोसिंथेसिस के लिए भी ज़रूरी होता है। जिसमें एक पौधा बढ़ने के लिए, सूर्य की ऊर्जा का इस्तेमाल कर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी को भोजन (शुगर के रूप में) में बदलता है।