भगवान ने मानव की संरचना इतनी ज्यादा अद्भुत बनाई है कि इंसान कभी अपने आप को आइने में देखता है तो शायद वह भी हैरान रह जाता है कि ईश्वर ने क्या चीज बनाई है। इंसानी शरीर को लेकर कई बार मन में लाखों सवाल आते हैं इसी तरह का एक सवाल है की आखिरीकार बालों की रंग काला ही क्यों होता है। हां, वैसे भूरा गोल्डन भी होता है लेकिन काला रंग ही खासतौर पर होता है।


बाल न सिर्फ किसी भी शख्स का लुक तय करते हैं बल्कि कई तरह से शरीर की रक्षा भी करते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि ये बाल आखिर काले ही क्यों होते हैं, इनका रंग हरा-पीला या फिर नीला क्यों नहीं होता है। भारत में रहने वाले ज्यादातर लोगों के बाल आपको काले ही मिलेंगे। लेकिन एक उम्र के बाद इनका सफेद होना लाजमी है।


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बालों के रंग के पीछे भी साइंस है और यही इनके काला होने की वजह है। काले बाल होना कोई नेचुरल प्रोसेस नहीं बल्कि इसके पीछे मेलानिन नाम का एक एलीमेंट काम करता है। मेलानिन शरीर की एक्टिविटी के अलावा रीजन पर भी निर्भर करता है। अगर इंसानी शरीर में मेलानिन की मात्रा ज्यादा होती है तो उसकी त्वचा का रंग भी डार्क हो सकता है।

इसी की वजह से भारत और आस-पास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बाल काले होते हैं लेकिन एक उम्र के बाद शरीर में इस तत्व की मात्रा कम होने लगती है और इंसान के बाल सफेद होते जाते हैं। बॉडी में सबसे ज्यादा मेलानिन बालों में ही पाया जाता है और इसी वजह से बाल काले होते हैं।


रिसर्च के मुताबिक मेलानिन के अलावा इंसानी जीन भी बालों के कलर के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके अलावा बढ़ती उम्र के साथ बाल सफेद होने लगते हैं लेकिन इसके लिए भी सिर्फ उम्र जिम्मेदार नहीं है। कुछ बीमारियां भी बालों को उड़ा देती हैं या फिर उनका रंग बदल देती हैं। साथ ही हेरिडिटी और बाहरी फैक्टर भी बालों का कलर बदल जाने के लिए जिम्मेदार होते हैं।