धरती पर सबसे जहरीले जीवों में एक सांप को भी माना जाता है जिसके काटने से इंसान की कुछ ही देर में मौत हो जाती है। लेकिन इस दुनिया में कुछ ऐसी मकड़ियां हैं जो जहरीले सांपों को भी मारकर खा जाती हैं। वह भी अपने आकार से 100 गुना ज्यादा बड़े और जहरीले सांप को। एक नई स्टडी में इस बात की जानकारी सामने आई है कि किस तरह की मकड़ियां जहरीले सांपों को भी मारकर खा जाती हैं। ये दुनिया की सबसे जहरीली मकड़ियां होती हैं।

इस स्टडी में मकड़ियों द्वारा सांपों को मारकर खाने की 319 घटनाओं का रिकॉर्ड है। इसमें से 297 मामले प्राकृतिक जगहों पर हुए हैं, जबकि बाकी 22 घटनाएं किसी बंद जगह जैसे- चिड़ियाघर या प्रयोगशाला। इन घटनाओं में से एक तिहाई मामले अलग-अलग साइंटिफिक जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। जबकि, बाकी न्यूज साइट्स और सोशल मीडिया पर शेयर की गई है।

यूनिवर्सिटी ऑफ बेस के कंजरवेशन बायोलॉजिस्ट मार्टिन निफेलर ने कहा कि मैं पिछले कई सालों से इन मकड़ियों पर अध्ययन कर कर रहा हूं। इससे पहले मैंने चमगादड़ों और पक्षियों को मारकर खाने वाली मकड़ियों पर रिपोर्ट बनाई थी। लेकिन हर बार जब मकड़ियों की स्टडी करता हूं तो इनकी ताकत देखकर हैरान हो जाता हूं। ये मकड़ियां इतनी ताकतवर हो सकती हैं, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया के हर्पैटोलॉजिस्ट जे. व्हाइटफील्ड गिबन्स ने कहा कि मकड़ियों की 30 प्रजातियां ऐसी हैं जो प्राकृतिक इलाकों में सापों को मारकर खा जाती हैं। जबकि बंद जगहों पर ये काम मकड़ियों की 11 प्रजातियां करती हैं। यह रिपोर्ट जर्नल ऑफ आर्कनोलॉजी में प्रकाशित हुई है। इसमें सबसे खतरनाक मकड़ी है ब्लैक विडो स्पाइडर (Black Widow Spider)। यह मारे जाने वाले सांपों में से आधे को खुद खत्म करती है।

ब्लैक विडो मकड़ी के अलावा ऑवरग्लास मार्क्ड ब्लैक विडो मकड़ी भी ये काम बहुत ज्यादा करती है। इसके अलावा अफ्रीका में पाई जाने अफ्रीकन बटन मकड़ी भी सांपों को मारकर चाव से खाती है। ये मकड़ियां मुश्किल से 1.1 सेंटीमीटर की होती हैं, लेकिन इनका जहर बहुत खतरनाक होता है। ये अपने से 100 गुना ज्यादा बड़े और जहरीले सांपों को मारकर खा जाती हैं।

टैरेंटुला मकड़ी प्रजाति की मकड़ियां 10 फीसदी सांपों को मारकर खाती हैं। बड़े आकार की ये मकड़ियां इतना मजबूत जाल बनाती हैं कि इसमें फंसने वाले बड़े जीव भी निकल नहीं पाते। इसके अलावा लार्ज ओर्ब-वीवर मकड़ी भी 8.5 फीसदी सांपों को मारकर खाती है। इनके जाल में अगर चमगादड़ और पक्षी फंस जाएं तो वह भी इस मकड़ी के शिकार बन जाते हैं। एक बार जो इन मकड़ियों के जाल में फंस गया, उसका ये पूरा खून चूस लेती हैं। अंगों को खा जाती हैं।

पूरी दुनिया में सिर्फ अंटार्कटिका एक ऐसी जगह है जहां पर ऐसी घटनाएं नहीं होती हैं। या फिर अब तक ऐसी कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है। दुनिया में मकड़ियों द्वारा सांपों को खाने की आधी घटनाएं अमेरिका में दर्ज की गई हैं। इसके ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में ऐसी घटनाएं ज्यादा होती हैं। मकड़ियां सांपों की 86 प्रजातियों का शिकार करती हैं। सबसे ज्यादा शिकार कोलूब्रिड फैमिली के सांप होते हैं। या फिर रैट स्नेक मकड़ियों का शिकार बनते हैं।

कोलूब्रिड फैमिली के सांप और रैट स्नेक अन्य कीट पतंगों की तरह ही मकड़ियों के जाल में फंस जाते हैं और फिर मौत का इंतजार करते हैं। मकड़िया सबसे ज्यादा छोटे सांपों (बच्चों) का शिकार करती हैं। लेकिन कभी-कभी ये बड़े आकार के सांपों को भी अपने डंक से मार डालती हैं। मकड़ियों द्वारा मारे जाने वाले सांपों के दर्ज इतिहास में अब तक किसी मकड़ी ने सबसे बड़े जिस सांप को मारा था, वह 3.25 फीट का था। इन्हें टैरेंटुला या ओर्ब-वीवर मकड़ियां ही मार पाती हैं।

ब्लैक विडो स्पाइडर अपने आकार और वजन से 30 गुना ज्यादा बड़े सांप को मार सकती हैं। कॉबवेब स्पाइर (Cobweb Spider) ने अपने आकार से 335 गुना बड़े सांप को मारा था। यह गार्टर सांप 6 इंच का था। जबकि मकड़ी इससे 335 गुना छोटी थी। मार्टिन कहते हैं कि किसी छोटी सी मकड़ी के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।

मार्टिन कहते हैं कि मकड़ी के काटने के बाद जहरीले सांप को मरने में कुछ घंटों से लेकर एक दिन का समय लगता है। अगर सांप ज्यादा जहरीला होता है तो उसे मरने में काफी ज्यादा समय लगता है। लेकिन वह मकड़ी के जहर के आगे पानी भी नहीं मांगता। अब तक मकड़ियों द्वारा जितने भी सांपों को मारने का रिकॉर्ड दर्ज है, उसमें से 86 फीसदी सांपों की मौत पक्की हुई थी। जबकि, 11 फीसदी सांपों को इंसानों द्वारा जाने-अनजाने में बचा लिया गया है।

मकड़ी एक बार किसी सांप को मारती है तो उसे कई दिनों तक खाती रहती है। इसलिए ऐसा शिकार उसके लिए काफी बहुमूल्य होता है। मार्टिन के हिसाब से ये मकड़ियों के लिए किस्मत वाला शिकार होता है। लेकिन टैरेंटुला मकड़ी सामान्यतौर पर सांपों का शिकार करती रहती है। ऑस्ट्रेलियन रेडबैक स्पाइडर सांपों और छिपकलियों को मारने में उस्ताद होती है। ये आमतौर पर इन्हें ही अपना शिकार बनाती है।

मार्टिन निफेलर ने बताया कि उन्हें सांपों से बहुत डर लगता है लेकिन उनके रिसर्च के दौरान उन्हें डर और हैरानी दोनों का अनुभव हुआ। जब वे मकड़ियों की दुनिया का अध्ययन कर रहे थे, उसी समय उन्हें सांपों की दुनिया की स्टडी करने का भी मौका मिला, जो कि एक प्राकृतिक घटना का परिणाम था।