कटलफिश बिना रीढ़ की हड्डियों वाले जीवों में सबसे बड़ा दिमाग रखने वाला जीव है। इसकी वजह से ये कुछ खास चीजें याद रख सकता है। जैसे- आखिरी बार उसने क्या खाया था। अब उसे क्या खाने की जरूरत है। यह हैरतअंगेज जानकारी हाल ही में हुई एक नई रिसर्च में सामने आई है। इससे ज्यादा चौंकाने वाली बात है कि इस जीव के तीन दिल होते हैं। 8 बाजू या सूंड़ होते हैं। इसका खून नीले-हरे रंग का होता है। यह बेहतरीन धोखेबाज होता है, ताकि शिकार कर सके और शिकार होने से बच सके।

सीफैलेपॉड्स श्रेणी के जीवों में स्क्विड, ऑक्टोपस, कटलफिश और नॉटिलस नाम के जीव आते हैं। कटलफिश की दो और खासियतें भी हैं, अगर इसका कोई बाजू या सूंड़ अलग हो जाए तो वह वापस उग जाता है। दूसरा ये जीवन के आखिरी दो सालों में खुद पर आत्म नियंत्रण करने में सफल होते हैं। यानी जब मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, तब ये शरीर की प्रक्रियाओं को नियंत्रित कर लेते हैं।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की डॉ. एलेक्जेंड्रा शनेल ने कहा कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि कटलफिश की उम्र कितनी है, इनकी याद्दाश्त इस मामले में बहुत अच्छी होती है कि इन्होंने आखिरी बार क्या खाया है। इसके बाद इनके शरीर को किसी तरह के खाने की जरूरत है ताकि वैसा ही शिकार खोजें। बेवजह मेहनत न करें। ये जीव बुढ़ापे तक इस बात को याद रखते हैं कि उन्होंने किस जगह पर क्या खाना खाया था।

वहीं, इंसानों के साथ ऐसा नहीं है। इंसान बढ़ती उम्र के साथ अपनी याद्दाश्त खोने लगता है या उसे कमजोर पाता है। यानी अगर आप किसी बूढ़े व्यक्ति से पूछो कि आखिरी बार आपने क्या खाया था, तो शायद सही-सही जवाब न मिले। दिमाग के अंदर कान के पास एक समुद्री घोड़े की आकृति का अंग होता है, जिसे हिप्पोकैंपस कहते हैं। याद्दाश्त का कमजोर होना या बीच-बीच में कुछ भूल जाना...ये इसी अंग की निष्क्रियता की वजह से होता है।

कटलफिश के दिमाग में हिप्पोकैंपस नहीं होता है। वहां पर एक वर्टिकल लोब होता है, जिसके जरिए कटलफिश कुछ याद रखता है। उसे अपनी मेमोरी में बिठा लेता है। अपनी स्टडी में डॉ. एलेक्जेंड्रा शनेल और उनके साथियों ने 24 कटलफिश पर प्रयोग किया। इसमें से आधे 10 से 12 महीने के उम्र के थे। यानी पूरी तरह से वयस्क नहीं थे। जबकि बाकी आधे 22 से 24 महीने के थे, जो कि इंसानों की 90 साल की उम्र के बराबर मानी जाती है।

यह स्टडी प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी जर्नल में प्रकाशित हुई है। एक प्रयोग में कटलफिश के दोनों समूहों को टैंक के अंदर एक खास जगह पर जाने की ट्रेनिंग दी गई। इस जगह पर फ्लैग से मार्किंग की गई थी। अलग-अलग समय पर दोनों समूहों को दो अलग-अलग तरह के खाने की चीजें दी गईं। एक मार्किंग पर किंग प्रॉन रखा गया। जो कि कटलफिश को कम पसंद है।

दूसरी मार्किंग पर ग्लास श्रिंप रखा गया। इसे कटलफिश पसंद करते हैं। यहां पर वैज्ञानिकों ने ग्लाश श्रिंप को तीन-तीन घंटे के अंतराल पर रखा। ऐसा चार हफ्तों तक किया गया। शुरुआत में प्रॉन की तरफ कटलफिश गईं, लेकिन बाद में उन्हें ये समझ में आ गया की थोड़ा इंतजार करने पर उन्हें उनके पसंद का खाना यानी ग्लास श्रिंप मिलेगा। उन्होंने प्रॉन की तरफ जाना ही छोड़ दिया।

वैज्ञानिकों ने यह जांचने के लिए क्या सच में कटलफिश अपनी पसंद का खाना याद रखता है। उन्होंने दोनों टैंक्स के अंदर मौजूद मार्किंग की जगह बदल दी। लेकिन कटलफिश को अपने पसंदीदा खाने की याद थी, वह उसी मार्किंग पर गया जहां से उसे ग्लास श्रिंप खाने को मिलता। हर दिन मार्किंग बदली जाती थी। हर दिन कटलफिश उसी मार्किंग तक पहुंच जाते थे। इससे वैज्ञानिकों को यह पता लगा कि कटलफिश को खाने में क्या पसंद है, कितनी देर में खाते हैं, कितना याद रखते हैं।

इस ट्रेनिंग के दौरान कटलफिश के दोनों समूहों के काम करने की क्षमता, याद्दाश्त आदि चीजों की तुलना की गई। इसमें देखा गया कि ज्यादा उम्र वाली कटलफिश के समूह ने कम उम्र वाले समूह को याद्दाश्त में हरा दिया। ग्लासगो यूनिवर्सिटी में नेचुरल हिस्ट्री के प्रोफेसर मैल्कम केनेडी ने कहा कि किसी जीव के अंदर इस तरह का आधुनिक संज्ञान पाना एक बेहद रोचक खोज है। यह इंसानों के दिमाग जैसी कार्यप्रणाली है।

प्रोफेसर मैल्कम ने कहा कि इंसान और कटलफिश (Cuttlefish) की उत्पत्ति में बहुत बड़े समय का अंतर है लेकिन इसके बावजूद इस तरह का नर्वस सिस्टम का होना जो ऐसी चीजें याद रखने में मदद करे, ये हैरान कर देता है। लेकिन मैल्कम कहते हैं कि यह वैसा ही काम है जैसा इंसान करते हैं। बस जीव अलग है और उसकी कार्यप्रणाली में अंतर है।

डॉ. एलेक्जेंड्रा शनेल ने कहा कि हो सकता है कि कटलफिश (Cuttlefish) की याद्दाश्त उसके ब्रीडिंग से जुड़ा हो। क्योंकि कटलफिश अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव में प्रजनन की प्रक्रिया करता है। ताकि उन्हें ये याद रहें कि उन्होंने किसके साथ संबंध बनाया। कहां बनाया और कितनी देर तक बनाया।

डॉ. शनेल ने कहा कि इसके जरिए उन्हें अपने वंश का पता रहता है। साथ ही ये भी जानकारी रहती है कि उनके जीन्स और किन-किन कटलफिश में मौजूद हैं। इसलिए वो अपने प्रजनन काल में अलग-अलग कटलफिश के साथ संबंध बनाते हैं। लेकिन किस-किस के साथ कब-कब और कहां-कहां संबंध बनाया, ये उन्हें याद रहता है।