आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे है जहां पर आपको दही जमाने के लिए बर्तन की नहीं बल्कि एक पत्थर की जरूरत पड़ती है। जी हां, हम बात कर रहे है राजस्थान की यहां पर जैसलमेर जिले में एक गांव है जहां पर आपको दही बर्तन में जमाने की जरूरत नहीं है बल्कि यहां पर एक ऐसा पत्थर है जिसके पास मात्र दूध रखने से दही अपने आप जम जाता है।


इस पत्थर को लेकर कई जगहों पर रिसर्च भी की जा चुकी है। दूर दूर से लोग इस पत्थर से बने बर्तन लेने आते है। इस पत्थर को हाबुर का पत्थर कहते है इसकी मांग निरन्तर बढ़ती जा रही है। यह दिखने में पिले रंग के होते है। यह अपनी पहचान सभी जगह बना चूका है। विदेशो में भी इसकी मांग हो रही है। इस पत्थर का उपयोग गांववाले दही जमाने के लिए करते है।


इस पत्थर से कई बर्तन बनाए जाते है जिनकी बिक्री काफी अच्छी होती है और मांग भी बढ़ती जा रही है। यहाँ के लोगो का कहना है की यहाँ पर पहले समुद्र हुआ करता था और उसके बाद समुद्री जीव समुद्रों के सूखने की वजह से जीवाश्म बन गए तब जाकर यहाँ पर पहाड़ो का निर्माण हुआ। जैसलमेर में आने वाले की विदेशी बस इसी पत्थर से बने बर्तनों को खरीदने ही आते है।