दुनिया बहुत ही आगे निकल गई है और आधुनिक हो गई लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी कुछ चीजें ऐसी हैं जिनका मतलब आज तक समझ नहीं आई है। टाइम (Time) देखने तो सबको आता है लेकिन टाइम यानी घड़ी में कुछ टाइमिंग ऐसी होती है जिनकों समझ पाना मुश्किल है।
जैसे कि जब छोटी सुई 1 और बड़ूी सुई 12 पर होती है तो इसे एक बजने कहते हैं इसी तरह से हर नंबर में होता है। लेकिन जब 10:30, 11:30, 12:30 को 'साढ़े दस', 'साढ़े ग्यारह' और 'साढ़े बारह' तो बोलते हैं मगर 1:30 और 2:30 को भी 'साढ़े एक' और 'साढ़े दो' क्यों नहीं बोलते हैं ?

आपको जानकर हैरानी होगी कि यह भारतीय गिनती की ही देन है। भारतीय गिनती में ही 'साढ़े' (Saadhe), 'पौने' (Paune), 'सवा' (Sava) और 'ढाई' (Dhai) का प्रचलन है। जिसका इस्तेमाल वक्त देखने में किया जाता है। आपको बता दें ये सभी शब्द फ्रैक्शन में चीजों को बताने के लिए इस्तेमाल होते हैं।

इसलिए कहते हैं ऐसा

समय हर किसी का महत्वपूर्ण होता है इसलिए सिर्फ वक्त बचाने के लिए इन शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे 'साढ़े एक' (Saadhe) कहने ज्यादा आसान है 'डेढ़' या 'ढाई' कहना होता है। छोटे शब्दों में सब कुछ क्लिर होता है। जैसे जब घड़ी में 4 बजकर 45 मिनट होते हैं तो उसे आसन और कम शब्दों में पौने पांच कह देते हैं।