अभी कलयुग चल रहा है। वैसे तो भारतिय ग्रंथों के मुताबिक 4 युग होते थे जिनमें से सतयुग भी शामिल हैं इस युग में ईश्वर जिनके पास ईसविद्या, मंत्रविद्या और तंत्रविद्या हुआ करती थी। अभी के समय यानी 21वीं सदी के समय में ईसविद्या, मंत्रविद्या और तंत्रविद्या को चमत्कार मानते हैं। इसी तरह हाल ही में रिसर्च टीम ने ऐसी चिड़िया खोजी है, जो आधी नर और आधी मादा है। इसका नाम रोज-ब्रेस्टेड ग्रूजबीक्स है। इसके एक हिस्से में नर चिड़ियों जैसे काले और बड़े पंख हैं, वहीं दूसरे मादा वाले हिस्से में ब्राउन और यलो पंख हैं। यह मादा चिड़िया के लक्षण है।


यानि की आधी नर और आधी मादा जो कि एक चिड़िया है। इसी तरह से सतयुग में ‘अर्धनारीश्वर’ मतलब आधा नर और आधी मादा ऐसा युग्म भगवान शिव और पार्वती थे। आज जिनको हम पूजते हैं। इस हिसाब से हम आज के युग में इस चिड़िया को अर्धनारीश्वर चिड़िया कह सकते हैं। बता दें कि इस अर्धनारीश्वर चिड़िया को खोजने वाले पेन्सिलवेनिया के पाउडरमिल नेचुरल रिजर्व के रिसर्चर्स का कहना है, जब चिड़िया नर और मादा दोनों होती है तो इसे गाएंड्रोमॉरफिज्म कहते हैं।

रिसर्चर्स ने इसके बारे में बताया कि इस तरह की चिड़िया (अर्धनारीश्वर चिड़िया) का जन्म तब होता है, जब नर के दो स्पर्म मादा के ऐसे अंडे से मिलते हैं, जिसमें दो न्यूक्लियस होते हैं। ऐसी स्थिति में भ्रूण में नर और मादा दोनों का क्रोमोजोम आ जाता है। उत्तरी अमेरिका में चिड़ियों की जनसंख्या की गणना करने के दौरान ये पाई गई। इस चिड़िया में भी दाहिना हिस्सा ही मादा वाला है। इसलिए यह अंडे भी दे सकती है और प्रजनन भी कर सकती है।