यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भारत से एक और नाम जुड़ गया है. इसी के साथ अब विश्व धरोहर सूची में भारत के कुल 40 स्थान शामिल हो गए हैं. भारत से 40वां नाम धोलावीरा है जो गुजरात में पड़ता है. यूनेस्को ने धोलावीरा को मंगलवार को विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया. बता दें कि धोलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता के पांच बड़े शहरों में से एक है. ये गुजरात में भुज से करीब 250 किमी की दूरी पर स्थित है. हड़प्पा काल के इस शहर को विश्व धरोहर बनाए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जाहिर की है. वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने भी इस शहर की योजना और वास्तुकला की भी काफी तारीफ की गई है.

बता दें कि इस धरोहर के दो हिस्से हैं. एक दिवार से घिरा हुआ शहर है और दूसरा इसके पश्चिमी हिस्से में एक कब्रिस्तान स्थित है. ऐसा माना जाता है कि यह शहर करीब 1500 सालों तक फला-फूला. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मुताबिक, धोलावीरा में हुई खुदाई के दौरान सात सांस्कृतिक चरणों का पता चला है, जो सिंधु घाटी सभ्यता के विकास और पतन की गवाही देते हैं. इसके अलावा धोलावीरा के दो खुले मैदानों और जल संचयन प्रणाली के बारे में जानकारी मिली है.

वहीं यूनेस्को की वर्ल्ड हैरिटेज कमेटी ने कहा कि दक्षिण एशिया में तीसरी से दूसरी मध्य सहस्राब्दी ईसा पूर्व के बीच यह सबसे उल्लेखनीय और अच्छी तरह से संरक्षित की गई शहरी बस्ती है. उन्होंने एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि, '1968 में खोजी गई यह जगह अपनी खास विशेषताओं के कारण अलग है. जैसे- जल प्रबंधन, कई स्तरों वाली रक्षा व्यवस्था, निर्माण में पत्थरों का अत्याधिक इस्तेमाल और दफन करने की खास संरचनाएं.' इसके अलावा शहर के साथ जुड़ी कला भी खास है.

बता दें कि धोलावीरा में खुदाई के दौरान तांबे, पत्थर, टेराकोटा के आभूषण, सोने की कलाकृतियां भी मिली थीं. एएसआई के मुताबिक, सभ्यता के शुरुआती चरणों से पता चलता है कि निवासी भवनों को प्लास्टर करने के लिए रंगीन मिट्टी को तवज्जो देते थे, लेकिन बाद में यह अचानक से खत्म हो गया. जैसे कोई शाही फरमान जारी किया गया हो या लोगों ने आपसी सहमति बना ली हो. बता दें कि साल 2014 से विश्व धरोहर सूची में भारत के 10 नये स्थान शामिल किये गये थे. उसके बाद अब धोलावीरा को भी इस सूची में जगह दी गई है जो भारती की 40वी विश्व धरोहर है.