सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय जवान का वीडियो वायरल हो रहा है। जी हां, ये कोई और नहीं बाबा हरभजन सिंह है। जिनके बहादुरी से चीन आज भी डरता है। यह सैनिक मरणोपरांत भी अपना काम पूरी मुस्तैदी और निष्ठा से कर रहा है। मरने के बाद भी वो सेना में कार्यरत है और उसकी पदोन्नति भी होती है। 30 अगस्त 1946 को जन्मे बाबा हरभजन सिंह, 9 फरवरी 1966 को भारतीय सेना के पंजाब रेजिमेंट में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। वायरल वीडियो में दिखाया गया है बाबा हरभजन सिंह ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं। और उनके नीचे वाली सीट पर एक महिला है। महिला की सफर के दौरान हरभजन सिंह से बात-चीत होती है। लेकिन जब महिला ट्रेन से उतरती है। तो उसे कोई हरभजन नाम का सैनिक नहीं मिलता। जिसके बाद सेना के अन्य जवान बाबा हरभजन सिंह की आईडी दिखाता है और कहता है आप बाबा हरभजन सिंह के बारे में इंटरनेट पर सर्च कर लीजिएगा। सच्चाई मता चल जाएगी। जिसके बाद महिला जब पता करती है तो उसके पैरों तले की जमीन खिसक जाती है। वीडियो में महिला का किरदार दिव्या दत्ता ने निभाया। इस वीडियों को बीबी की विनस यू-ट्यूब चैनल ने पिछले साल सितंबर में अपलोड किया था जिसे अबतक 16,885,313 बार देखा जा चुका है। वीडियो यू-ट्यूब के अलावा फेसबुक, वाट्सएप इत्यादि पर वायरल हो रहा है।

1968 में वो 23वें पंजाब रेजिमेंट के साथ पूर्वी सिक्किम में सेवारत थे। 4 अक्टूबर 1968 को खच्चरों का काफिला ले जाते वक्त पूर्वी सिक्किम के नाथू ला पास के पास उनका पांव फिसल गया और घाटी में गिरने से उनकी मृत्यु हो गई। पानी का तेज बहाव उनके शरीर को बहाकर 2 किलोमीटर दूर ले गया। कहा जाता है कि उन्होंने अपने साथी सैनिक के सपने में आकर अपने शरीर के बारे में जानकारी दी। खोजबीन करने पर तीन दिन बाद भारतीय सेना को बाबा हरभजन सिंह का पार्थिव शरीर उसी जगह मिल गया।


कहा जाता है कि सपने में ही उन्होंने इच्छा जाहिर की थी कि उनकी समाधि बनाई जाये. उनकी इच्छा का मान रखते हुए उनकी एक समाधि भी बनवाई गई. लोगों में इस जगह को लेकर बहुत आस्था थी लिहाजा श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने 1982 में उनकी समाधि को 9 किलोमीटर नीचे बनवाया दिया, जिसे अब बाबा हरभजन मंदिर के नाम से जाना जाता है। हर साल हजारों लोग यहां दर्शन करने आते हैं। उनकी समाधि के बारे में मान्यता है कि यहां पानी की बोतल कुछ दिन रखने पर उसमें चमत्कारिक गुण आ जाते हैं और इसका 21 दिन सेवन करने से श्रद्धालु अपने रोगों से छुटकारा पा जाते हैं।


कहा जाता है कि मृत्यु के बाद भी बाबा हरभजन सिंह नाथु ला के आस-पास चीन सेना की गतिविधियों की जानकारी अपने मित्रों को सपनों में देते रहे, जो हमेशा सच साबित होती थीं। और इसी तथ्य के आधार पर उनको मरणोपरांत भी भारतीय सेना की सेवा में रखा गया। उनकी मौत को 48 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी बाबा हरभजन सिंह की आत्मा भारतीय सेना में अपना कर्तव्य निभा रही है। बाबा हरभजन सिंह को नाथू ला का हीरो भी कहा जाता है।


बाबा के मंदिर में बाबा के जूते और बाकी सामान रखा गया है। भारतीय सेना के जवान बाबा के मंदिर की चौकीदारी करते हैं। और रोजाना उनके जूते पॉलिश करते हैं, उनकी वर्दी साफ करते हैं, और उनका बिस्तर भी लगाते हैं। वहां तैनात सिपाहियों का कहना है कि साफ किए हुए जूतों पर कीचड़ लगी होती है और उनके बिस्तर पर सिलवटें देखी जाती हैं। बाबा की आत्मा से जुड़ी बातें भारत ही नहीं चीन की सेना भी बताती है। चीनी सिपाहियों ने भी, उनको घोड़े पर सवार होकर रात में गश्त लगाने की पुष्टि की है। भारत और चीन आज भी बाबा हरभजन के होने पर यकीन करते हैं। और इसीलिए दोनों देशों की हर फ्लैग मीटिंग पर एक कुर्सी बाबा हरभजन के नाम की भी रखी जाती है।


सारे भारतीय सैनिकों की तरह बाबा हरभजन को भी हर महीने वेतन दिया जाता है। सेना के पेरोल में आज भी बाबा का नाम लिखा हुआ है। सेना के नियमों के अनुसार ही उनकी पदोन्नति भी होती है। अब बाबा सिपाही से कैप्टन के पद पर आ चुके हैं। हर साल उन्हें 15 सितंबर से 15 नवंबर तक दो महीने की छुट्टी दी जाती थीं और बड़ी श्रद्धा के साथ स्थानीय लोग और सैनिक एक जुलुस के रूप में उनकी वर्दी, टोपी, जूते और साल भर का वेतन दो सैनिकों के साथ, सैनिक गाड़ी में नाथुला से न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन लाते। वहां से डिब्रूगढ़ अमृतसर एक्सप्रेस से उन्हें जालंधर (पंजाब) लाया जाता।


गाड़ी में नाम का टिकट भी बुक किया जाता। यहां से सेना की गाड़ी उन्हें उनके गांव तक छोडने जाती। वहां सब कुछ उनके मां को सौंपा जाता फिर उसी ट्रेन से उसी आस्था और सम्मान के साथ उनके समाधि स्थल वापस लाया जाता। लेकिन कुछ साल पहले इस आस्था को अंधविश्वास कहा जाने लगा, तब से यह यात्रा बंद कर दी गई। इस तरह की आस्था पर भले ही सवाल उठाए जाएं और अंधविश्वास कहा जाए लेकिन भारतीय सैनिकों का मानना है कि उन्हें यहां से शक्ति की अनुभूति होती है।

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