अरुणाचल प्रदेश के तवांग में तो हर साल एक कल्चरल फेस्टिवल आयोजित किया जाता है, जहां टूरिस्टों का पूरे जोश के साथ स्वागत किया जाता है। इस फेस्टिवल का नाम तवांग फेस्टिवल है, जो 26 अक्टूबर से शुरू हो गया है। तवांग फेस्टिवल हर साल इसलिए आयोजित किया जाता है कि देश और दुनिया के हर कोने से आने वाले लोगों को अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरती, कल्चर और अन्य परंपराओं को करीब से जानने और समझने का मौका मिले। इसके अलावा इस फेस्टिवल में बौद्ध परंपराओं और उनके कल्चर को भी हिस्सा बनाया जाता है। 

तवांग फेस्टिवल में यहां की जनजातियों के आकर्षक डांस और अन्य नाटक भी दिखाए जाते हैं, लेकिन सबसे खास होता है याक डांस। इसमें याक डांस करते हैं और उनके हुजूम को इस तरह डांस करते देखना काफी आकर्षक लगता है। इस फेस्टिवल में अरुणाचल प्रदेश में रहने वाली जनजातियों के द्वारा बनाई गई चीजें भी मिलती हैं। यह फेस्टिवल कितना आकर्षक और लोकप्रिय है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे 2017 के 'बेस्ट कल्चरल फेस्टिवल' और 'बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन' के खिताब से नवाजा गया। 

इस बार भी तवांग फेस्टिवल सर्दियों में धूम मचाने के लिए तैयार है। अगर आप अरुणाचल प्रदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं तो फिर तवांग फेस्टिवल में जरूर शामिल हों। बता दें कि तवांग, गुवाहाटी से 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गुवाहाटी से जाने वाले लोग तेजपुर तक जा सकते हैं और फिर वहां से टाटा सूमो या फिर महिंद्रा बोलेरो ले सकते हैं। इसके अलावा टूरिस्ट फेस्टिवल में शामिल होने के लिए पहले सलोनीबारी एयरपोर्ट जा सकते हैं। तवांग फेस्टिवल का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट तेजपुर है। तेजपुर उतरकर आप वहां से टाटा सूमो या फिर महिंद्रा बोलेरो बुक कर सकते हैं। 

तवांग फेस्टिवल में क्या करें 

फीमेल बुद्ध यानी तारा की मूर्ति जरूर देखने जाएं। 80 फीट ऊंची यह मूर्ति 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है और सभी के आकर्षण का केंद्र है। भारत की सबसे लंबी सड़क यानी सेला पास भी देखने लायक है। इसके अलावा यहां का जोगा टाइगर लेक भी काफी पॉप्युलर है। यहां की तवांग मोनेस्ट्री भी काफी फेमस है। इस मोनेस्ट्री को Galden Namgey Lhatse के नाम से भी जाना जाता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी मोनेस्ट्रीज में से एक है। तवांग वॉर मेमोरियल भी देखने लायक है। इसे 1962 के युद्ध में शहीद हुए 2140 भारतीय जवानों की याद में बनाया गया है। अरुणाचल प्रदेश की जान यानी नौरंग फॉल्स को भला कैसे भूला जा सकता है। 100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस फॉल का व्यू देखते ही बनता है।