केंद्र सरकार द्वारा पास किए 3 कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसानों के आंदोलन में हरियाणा के एक किसान द्वारा 51 लाख रुपये की भैंस बेच कर लंगर लगाने की चर्चा हो रही है। यह खबर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। लेकिन इसके पीछे का सच कुछ और ही है जिसके जानकर हर कोई हैरार रह सकता है।

यह मामला पंजाब के कस्बा माछीवाड़ा का है जहां एक पशु पालक किसान पवित्र सिंह ने कहा हे कि उसने मोहरा नस्ल की सरस्वती भैंस को 51 लाख में नहीं खरीदा बल्कि उसने 7 भैंसों के साथ ढाई लाख रुपये नगद दिए थे। यह डील हरियाणा के व्यापारी सुखबीर टांडा से टांडा से हुई थी।
इस बारे में पवित्र सिंह का कहना है कि सरस्वती भैंस को मैंने 51 लाख रुपये में नहीं बल्कि 7 भैंसों के साथ ढाई लाख रुपये नगद देकर हरियाणा के जिला हिसार के गांव लताणी के व्यापारी सुखबीर टांडा से खरीदी थी।

पवित्र सिंह का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोगों को गलत बताकर गुमराह किया जा रहा है कि हरियाणा के व्यापारी सुखबीर टांडा ने 51 लाख में मोहरा नस्ल की भैंस सरस्वती को बेच कर दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन में लंगर लगाया है। इसमें सच यह है कि सुखबीर टांडा ने किसान आंदोलन में लंगर जरूर लगा रखा है। मगर लोगों के सहयोग से लगाया हुआ है जिसमें मैं भी सेवा करके आया हूं।
पवित्र सिंह का कहना है कि उसने सरस्वती को फरवरी महीने में खरीदा था। मोहरा नस्ल की सरस्वती भैंस के बदले में उसने हरियाणा के व्यापारी सुखबीर टांडा को 7 भैंसे व ढाई लाख रुपये नगद दिए थे। अब मेरे द्वारा दी गई 7 भैंसों को सुखबीर टांडा ने 51 लाख रुपये में बेचा है या इससे कम मूल्य में, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।
पवित्र सिंह व नंबरदार हरजीत सिंह का कहना है कि सरस्वती भैंस जब सुखबीर टांडा के पास थी तब उसने एक समय में 33.131 किलोग्राम दूध देने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था जिसको अभी पाकिस्तान की भैंस ने तोड़ते हुए एक दिन में 33.856 किलोग्राम दूध द‍िया।