कोरोना काल में लाखों लोगों ने अपनी नौकरियां खोइ है। कई लोगों ने कोरोना लॉकडाउन में अपने हाथ के हुनर को परखा है। कुछ लोगों को लॉकडाउन में ऐसे ऐसे आइडिया आए है जिससे वह घर बैठे पैसे कमा रहे हैं। लॉकडाउन ने लोगों को अपने आप को पहचानने की पावर दे दी है। भले ही लॉकडाउन ने कई  चीजों में दुख दिए हैं। इसी तरह से 77  वर्षीय उर्मिला जमनादास आशेर को भी लॉकडाउन ने अमीर बना दिया है।


उर्मिला जमनादास मुंबई के लोगों द्वारा दिए गए खाने के आर्डर को पूरा करने के लिए स्नैक्स तैयार करती है। उर्मिला जमनादास का रेस्तरांनुमा दूकान 'गुज्जू बेन ना नास्ता' में स्वादिष्ट भोजन तैयार होता है। उर्मिला जमनादास ने 77 साल की उम्र में अपना फूड बिजनेस शुरू किया है। कोरोना काल में बाहर का बाजार का खाना नहीं मिलने के कारण फूडी लोग परेशान हो चुके हैं।

उर्मिला जमनादास अपने अकेल पोते के साथ रहती है। उनका पूरा परिवार किसी न किसी दुर्घटना में मारा गया है। अब वबस वह अपने पोते हर्ष के साथ ही अकेली रहती है। हर्ष ने 2012 में एमबीए पूरा किया, और भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ओमान मंत्रालय के साथ काम किया है। हर्ष ने बताया कि दादी उर्मिला गुजराती अचार बड़े चाव से बनाती हैं।

हर्ष ने दादी के बनाए अचार की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की तो लोगों ने काफी अच्छा रिस्पांस दिया। जब डिमांड बढ़ने लगी तो प्रोडक्ट भी बढ़ा दिए, अचार के साथ-साथ सूखा और गर्म नाश्ता भी हम लोगों तक पहुंचाने लगे। धीरे-धीरे कुछ महीने बाद 'गुज्जू बेन ना नास्ता' नाम से अपनी एक दुकान खोली और लॉकडाउन में दादी का शानदार फूड बिसनेस शुरू हो गया है।