त्रिपुरा में सोशल मीडिया पर युवा डॉक्टर की पोस्ट के बाद अगरतला कोविड अस्पताल में डॉक्टर की दादी की मौत ने मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव सरकार की स्वास्थ्य सेवा को कटघरे में खडा कर दिया और उपचार के लिए रैपिड एंटीजन किट की विश्वसनीयता का सवालिया निशान खड़े किए हैं। डॉ अभिक्षा दास ने अगरतला सरकार मेडिकल कॉलेज (एजीएमसी) से एमबीबीएस किया और अब वह लंदन में प्रैक्टिस कर रही हैं। 

उन्होंने राज्य की नाजुक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर एक वीडियो जारी किया। डॉ दास ने बताया कि उसकी दादी बीनापानी रॉय को बाथरूम के गिरने के बाद बेहाशी की हालत में 31 जुलाई को राज्य के नामी गिरामी अस्पताल आईजीएम लाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार उनकी दादी को रैपिड टेस्ट किया गया था और पांच मिनट के अंदर उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव बतायी गयी जो बेहद हास्यास्पद है और उन्हें तुरंत एजीएमसी के कोविड अस्पताल भेज दिया गया। 

उन्होंने कहा, मैं और मेरी बहन बेंगलुरु के निमहांस में भी डॉक्टर हैं और हम आईसीयू में तीन दिनों तक 12 घंटे वैकल्पिक पारी में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट पहने उनके साथ रहे, लेकिन उन्हें कोई उपचार नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में रिपोर्ट आने से पहले तीन दिन के बाद उनकी मृत्यु हो गयी और उनका अन्य कोविड मरीजों की तरह आइसोलेशन में अंतिम संस्कार किया गया। जबकि अंतिम संस्कार के अगले दिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव आयी। डॉ दास ने सवाल किया कि मरीज की बिना उपचार के ही मौत हो जाती है क्योंकि उसका गलत निदान किया गया और उसकी झूठी परीक्षण रिपोर्ट को पॉजिटिव करार दिया गया। 

उन्होंने यहां तक कहा कि अगर कोई कोरोना संक्रमित है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे वास्तविक बीमारी के इलाज से वंचित रखा जाएगा। डॉ. दास के अनुसार एजीएमसी की छात्रा होने के नाते उसे बताया गया था कि रोगी का आरटीपीआर परीक्षण आपात स्थिति के आधार पर लिया गया लेकिन दुर्भाग्यवश उनका कोरोना नमूना दो दिनों के बाद लिया गया था। इस दौरान उन्हें बेहद खराब आईसीयू में रखा गया और उन्हें किसी तरह का उपचार नहीं दिया क्योंकि कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनकी वास्तिवक परेशानी का कोई निदान नहीं किया गया। 

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और आईएनपीटी ने त्रिपुरा सरकार पर कोविड की स्थिति का प्रबंधन करने और राज्य में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में सुधार में विफलता का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले एक साल में राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं, बुनियादी ढांचे और प्रबंधन के मामले बहुत तेजी से बिगड़े है। इससे पहले विपक्षी दलों ने त्रिपुरा उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश द्वारा एजीएमसी में वेंटिलेशन की कथित खराबी पर न्यायिक जांच की मांग की, जिसकी कथित रूप से ऑक्सीजन आपूर्ति प्रणाली बाधित थी और जो आईसीयू में मरीजों की मौत का कारण बनी है।