तृणमूल कांग्रेस त्रिपुरा में ‘सहानुभूति लहर’ के सहारे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की कथित ‘आतंक की रणनीति’ और मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के खिलाफ व्याप्त ‘असंतोष’ को भुनाने के प्रयास में है जिसके लिए अगले विधानसभा चुनावों के पहले राज्य में भाजपा के खिलाफ सभी दलों को एकजुट करने की कोशिशें जारी हैं। 

कांग्रेस के अलावा, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, उसके युवा नेताओं देबांग्शु भट्टाचार्य, जया दत्ता और सुदीप राहा पर भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से किये गये कथित हिंसक हमले तथा तृणमूल नेताओं को झूठे मामलों में फंसाने के बाद विपक्षी माकपा सहानुभूति अर्जित करने में सफल रही है। इतना ही नहीं स्वतंत्रता दिवस के दिन दक्षिण त्रिपुरा में तृणमूल की दो महिला सांसदों पर हमला किया गया। 

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पोलित ब्यूरो सदस्य माणिक सरकार ने हमले की घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा न केवल त्रिपुरा में बल्कि पूरे देश में लोकतंत्र का मुखौटा अपने चेहरे पर लगाकर फासीवादी विचारधारा के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इन हमलों को एकजुट होकर रोकने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थानों पर हमला किया जा रहा है और विपक्ष के अधिकारों को वश में करके एक-पक्षीय शासन स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। 

उन्होंने कहा, त्रिपुरा में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का आगमन कोई नई बात नहीं है। वे अपनी पार्टी की स्थापना के बाद से राज्य में आते रहे हैं और चुनाव लड़े हैं। नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं निकले लेकिन कभी बाधित नहीं हुए लेकिन इस बार सत्ताधारी दल ने अलोकतांत्रिक तरीके से प्रतिक्रिया दी।सरकार ने कहा कि त्रिपुरा में वाम मोर्चे के 25 साल के शासन के दौरान ऐसी एक भी घटना नहीं हुई और जब भी कोई राजनीतिक हिंसा हुई, सरकार ने राजनीति से परे जा कर अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि हिंसक स्थिति से निपटने के लिए पुलिस को खुली छूट दी गई थी और किसी को भी नहीं बख्शा गया था, लेकिन आज राज्य में शासन की एक नई संस्कृति आ गई है, जहां सत्ताधारी दल और सरकार ने सांसदों और मीडिया के लोगों पर भी हमलों की निंदा नहीं की। सरकार ने हालांकि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को हटाने की लड़ाई को मजबूत करने के लिए तृणमूल में शामिल होने के लिए माकपा के युवाओं से हालिया आह्वान के प्रति उन्होंने कुछ नहीं कहा। 

तृणमूल सूत्रों ने दावा किया कि सुष्मिता देव के तृणमूल में आने के बाद बिरजीत सिन्हा, गोपाल राय और प्रभावशाली युवा कांग्रेस नेता बप्तू चक्रवर्ती जैसे दिग्गज नेताओं सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेताओं ने अपने अनुयायियों के साथ टीएमसी में कतारें लगा दी हैं। इसी तरह, कम से कम छह भाजपा विधायक और एक दर्जन भाजपा कार्यकर्ता तृणमूल की संभावित सूची में हैं। इस बीच, सोमवार को यहां पहुंची तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा की प्रमुख सायोनी घोष ने आरोप लगाया कि त्रिपुरा सरकार ने उस होटल में बिजली बंद कर दी है, जहां मंगलवार सुबह से पांच सांसदों सहित टीएमसी नेता ठहरे हुए हैं।