साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की कोयला खदानों की सुरक्षा जनवरी माह से त्रिपुरा स्टेट राइफल (टीएसआर) संभालेगी। कमांडेट समेत 35 जवानों की टीम कुसमुंडा पहुंच चुकी है। एसईसीएल के सुरक्षा प्रबंधक के साथ पूरे क्षेत्र का निरीक्षण कर तैनाती स्थल का जायजा ले रही है। टीएसआर के शत प्रतिशत आर्म्सगार्ड होंगे, इनमें 85 फीसदी एक्स सर्विसमैन हैं। इन्हें खदान के अंदर व मैग्जिन (बारूद कक्षा) की भी सुरक्षा का जिम्मा सौंपा जाएगा।

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की खदानों में बढ़ रही कबाड़, डीजल चोरी व अन्य आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए प्रबंधन ने कवायद तेज कर दी है। इसे रोकने के लिए कोयला मंत्रालय व गृह मंत्रालय के मध्य सहमति बनने के बाद एसईसीएल ने त्रिपुरा स्टेट राइफल्स से एमओयू किया है। सहमति पत्र में हस्ताक्षर होने के साथ ही टीएसआर की टीम ने भी अपनी आमद दे दी।

बताया जा रहा है कि कुसमुंडा क्षेत्र में कमाडेंट, डिप्टी कमाडेंट समेत 35 सदस्य पहुंच चुके हैं और इन्हें वर्तमान में डीएवी स्कूल में ठहराया गया है। अधिकारियों ने अपनी तैनाती को लेकर निरीक्षण करना भी शुरू कर दिया है। एसईसीएल ने सहयोग के लिए बिलासपुर मुख्यालय में पदस्थ सुरक्षा प्रबंधक दक्षिणामूर्ति को टीएसआर के साथ अधिकृत किया है। अधिकारियों की टीम सभी क्षेत्र में घूमकर तैनाती स्थल, ठहरने के लिए बैरक व अन्य सुविधा के संबंध में जानकारी एकत्र कर रहे हैं।

पूरी रिपोर्ट तैयार के बाद टीएसआर अपने जवानों को तैनात करेगा। एसईसीएल से जुड़े जानकारों का कहना है कि जनवरी माह से टीएसआर के जवान अपना काम संभाल लेंगे। समझौता के मुताबिक एक हजार सात जवान में एक्स सर्विसमेन के साथ ही सभी गनमैन रहेंगे।

टीएसआर के जवानों को ठहरने के लिए एसईसीएल ने बैरक बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि कबीर चौक के पास सर्वसुविधायुक्त बैरक बनाने के लिए एसईसीएल ने निविदा भी जारी कर दी है। इसके साथ ही वाहन समेत अन्य सुविधाएं भी एसईसीएल प्रबंधन उपलब्ध कराएगा। इसकी तैयारी भी प्रबंधन ने शुरू कर दी है।

एसईसीएल की कुसमुंड़ा खदान में 301 जवान तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही केंद्रीय कर्मशाला कोरबा, स्टोर, उत्खनन कर्मशाला, मानिकपुर, सराईपाली कुल सौ जवान रहेंगे। रायगढ़ में 220, विश्रामपुर, बैकुंठपुर, भटगांव, चिरमिरी में 70-70 जवानों की तैनाती की जाएगी। द्वितीय चरण में गेवरा व दीपका टीएसआर की तैनाती की जाएगी। इस तरह कुल 1007 जवानों को एसईसीएल के खदान क्षेत्र में सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

जानकारों का कहना है कि टीएसआर के सभी जवान आर्म्स से लैस रहेंगे, पर कुछ जवानों को ही आर्म्स चलाने की अनुमति रहेगी। जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन लिया जाएगा और टीएसआर राज्य शासन के आला अधिकारियों से अनुमति लेकर गन चलाने की छूट प्रदान करेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि टीएसआर की तैनाती के बाद खदानों में आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगेगा।