त्रिपुरा विधानसभा (Tripura Legislative Assembly) के सदस्य सुदीप रॉय बर्मन (Sudip Roy Barman) ने 25 नवंबर को होने वाले निकाय चुनाव से पहले त्रिपुरा पुलिस के डीजीपी (Tripura Police DGP) को पत्र लिखा है। पत्र में बर्मन ने डीजीपी से अगरतला नगर निगम (Agartala Municipal Corporation) के कुछ वार्डों को ‘संवेदनशील और अति संवेदनशील’ घोषित करने की अपील की है।

बर्मन ने पत्र में आरोप लगाया है कि यहां बदमाशों और अपराधियों की “मौज-मस्ती” हो रही है और कानून हाथ में लिया जा रहा है। बर्मन ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि राज्य में “आतंक का शासन” है। उन्होंने एक वार्ड के उम्मीदवार का उदाहरण देते हुए कहा, ‘उम्मीदवार खुले तौर पर अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं को मतदान के लिए नहीं आने की धमकी दे रहा है और आने पर उन्हें परिणाम भुगतने के लिए कह रहा है।’

बर्मन ने कहा, ‘मुझे यह देखकर दुख होता है कि लोगों का पुलिस पर से भरोसा उठता जा रहा है। पुलिस जब दबाव में झुक जाती है, तब बदमाश और अपराधी कानून को अपने हाथ में लेने लगते हैं।’ बर्मन ने त्रिपुरा पुलिस के डीजीपी से कहा, ‘एक जन प्रतिनिधि होने के नाते मुझे आप पर और आपके अच्छे पद पर बहुत भरोसा है। मुझे विश्वास है कि आप आम लोगों का खोया हुआ विश्वास वापस पाने के लिए इस तरह के सभी आवश्यक और साहसिक कदम उठाएंगे।’

बर्मन ने कहा, ‘आप यह भी जानते हैं कि अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय से काफी संख्या में मतदाता आते हैं और इस तरह की एक चिंगारी घर को जला देगी। उदाहरण के लिए वार्ड नंबर 13 का उम्मीदवार, जो खुले तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं को धमकी दे रहा है कि वे चुनाव के दिन उपस्थित न हों, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।’

बर्मन ने पुलिस से यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है कि मतदाता बिना किसी बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा था कि यह सुनिश्चित करना त्रिपुरा पुलिस के अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि किसी भी राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण तरीके से राजनीतिक प्रचार के लिए कानून के अनुसार अपने अधिकारों का प्रयोग करने से रोका न जाए।