मुख्यमंत्री बिप्लब देब के बाद अब त्रिपुरा के कानून मंत्री रतन लाल नाथ ने दावा किया है कि अमेरिका और श्रीलंका सहित कई देश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आदर्शों से प्रभावित हैं और उन्हें अपनाने पर विचार कर रहे हैं। नाथ ने सीएम बिप्लब देब के बयान का बचाव करते हुए यह बात कही है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के बयान को गलत समझ लिया गया। उनके कहने का मतलब था कि बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और सभी देश बीजेपी के सिद्धांतों से प्रभावित हैं।”

मंत्री रतन लाल ने सीएम के बचाव में कहा, “श्रीलंका के लोग बीजेपी के विचारों को स्वीकार करने की सोच रहे हैं। अमेरिका भी ऐसा ही सोच रहा है। पूरी दुनिया ऐसा सोच रही है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बीजेपी वहां कोई अपनी पार्टी बनाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि पूरी दुनिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों और उनके व्यक्तित्व से आकर्षित हुई है।

इसके अलावा मंत्री रतन लाल नाथ ने केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा, “हमने कोरोना वैक्सीन लॉन्च किया और दूसरे देश हमसे वैक्सीन ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। इसलिए पूरी दुनिया उनके आदर्शों और विचारों के बारे में सोच रही है।”

त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देब ने रविवार को अगरतला में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया था कि बीजेपी के विस्तार की योजना सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों में भी करने की है। उन्होंने कहा था, “हम राज्य के गेस्ट हाउस में (2018 त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के दौरान) बातचीत कर रहे थे। उस दौरान अजय जामवाल (बीजेपी के नॉर्थ ईस्ट जोनल सेक्रेटरी) ने कहा था कि बीजेपी ने कई राज्यों में सरकार बना ली है। इस पर अमित शाह ने जवाब में कहा था कि अब श्रीलंका और नेपाल बाकी हैं। हमें पार्टी का विस्तार श्रीलंका और नेपाल मे पार्टी का विस्तार करना है और वहां जीतकर सरकार बनानी है।”

बिप्लब देब के बयान के बाद श्रीलंका और नेपाल ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। श्रीलंका के चुनाव आयोग के प्रमुख निमल पंचीवा ने बिप्लब देव के बयान के बाद कहा था कि देश का चुनाव कानून इस तरह के प्रबंध की इजाजत नहीं देता। पंचीवा ने कहा था, “श्रीलंका का कोई भी राजनीतिक दल विदेश में किसी भी दल या समूह से संबंध रख सकता है लेकिन हमारा चुनाव कानून किसी अन्य विदेशी दल को श्रीलंका में काम करने की अनुमति नहीं देता।” वहीं नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञवाली ने ट्विटर पर बताया था कि नेपाल सरकार ने भारत के सत्ताधारी दल के नेता की टिप्पणी पर अपनी औपचारिक आपत्ति जता दी है।