त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने राज्य के गृह सचिव शरदिंदु चौधरी पर अवमानना का आरोप तय करने के बाद निजी मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति सुभाषिश तालापात्रा की पीठ ने बुधवार को चौधरी पर आरोप लगाया कि उन्होंने पिछले साल उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ पीठ द्वारा एक पीठ के आदेश को बरकार रखने के बावजूद अदालत के आदेश का पालन नहीं किया और उच्चतम अदालत ने भी उन्हें कोई राहत नहीं दी। 

ये भी पढ़ेंः 26 मार्च से त्रिपुरा सरकार फिर से खोलेगी 2 बार्डर हाट, मंत्री ने दी जानकारी


अदालत ने कहा कि सुनवाई 11 अप्रैल से शुरू होगी। याचिकाकर्ता के वकील पी रॉय बर्मन ने कहा कि अदालत ने 30,000 रुपये के निजी मुचलके पर उसकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। गृह सचिव ने दलील दी थी कि वह अदालत के आदेश को पालन करने में असमर्थ रहे क्योंकि यह उनके ‘उच्च अधिकारी’ द्वारा स्वीकृत नहीं था। वह हालांकि इस संबंध में अदालत को विस्तारपूर्ण जानकारी नहीं दे पाये।

ये भी पढ़ेंः कई राज्यों में लू का कहर जारी, बढ़ती गर्मी को लेकर मौसम विभाग ने जारी की ऐसी चेतावनी


वहीं दूसरी तरफ त्रिपुरा के भाजपा विधायक शंभू लाल चकमा ने राज्य के सभी मदरसों को बंद करने की मांग की है। त्रिपुरा के भाजपा विधायक ने मंगलवार को राज्य विधानसभा को संबोधित करते हुए यह मांग उठाई। विधायक चकमा ने आरोप लगाया कि जब तक राज्य में मदरसों को बंद नहीं किया जाता तब तक गुमराह करने की कोशिश जारी रहेगी। भाजपा विधायक ने असम का उदाहरण दिया जहां सरकारी मदरसों को बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में भी इसी तरह के कदम उठाए जाने चाहिए।त्रिपुरा के भाजपा विधायक शंभू लाल चकमा के बयान विपक्षी माकपा विधायक इस्लाम उद्दीन की टिप्पणी के जवाब में आए हैं कि पिछले साल त्रिपुरा के पानीसागर में सांप्रदायिक हिंसा ने समुदायों के बीच सांप्रदायिक वैमनस्य के बीज बोए थे।