त्रिपुरा उच्च न्यायालय (Tripura High Court) ने सार्वजनिक स्थानों पर जानवरों के वध पर प्रतिबंध (slaughtering of animals in public) लगाने का एक आदेश पारित किया और अगरतला नगर निगम (Agartala Municipal Corporation) के अधिकारियों को अस्थायी सुविधाओं की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया, ताकि जब तक प्रस्तावित बूचडख़ाना (slaughterhouse ) ना बन जाए तब तक जानवरों का वध किया जा सके। 

ये भी पढ़ें

माकपा ने किया ताकत का प्रदर्शन, येचुरी बोले -मैं उन्हें चुनौती देना चाहता हूं, शांतिपूर्ण चुनाव कराएं, फिर देखें जनादेश


मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती (Chief Justice Indrajit Mahanty) की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने बाजारों में बेचे जा रहे मांस की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त की और पशुपालन विभाग (Department of Animal Husbandry) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution Control Board) जैसी सरकारी एजेंसियों को लगातार निगरानी के निर्देश दिए। इससे पहले अदालत ने अगरतला नगर निगम आयुक्त शैलेश कुमार यादव को मंगलवार को उच्च न्यायालय में पेश करने का आह्वान किया था। यादव की दलीलें सुनने के बाद पांच पन्नों का आदेश पारित किया गया। यादव ने न्यायालय को सूचित किया कि आरके नगर क्षेत्र में पूरी तरह से सुसज्जित बूचडख़ाने की स्थापना के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। निविदा के 18 महीनों के भीतर परियोजना के निर्माण कार्य समाप्त होने की उम्मीद है।

ये भी पढ़ें

कटहल बेचकर करोड़पति बनेंगे इस राज्य के किसान, सरकार ने शुरू की जबरदस्त योजना


कोर्ट ने कहा कि एएमसी को न केवल बूचडख़ाने (slaughterhouse ) की स्थापना बल्कि उचित वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निपटान को सुनिश्चित करने के लिए एक दीर्घकालिक योजना तैयार करनी चाहिए। एएमसी अधिकारियों के अनुसार कुल 139 मांस बेचने वाली दुकानें हैं जिन्हें लाइसेंस प्राप्त है। यदि अधिक लोग लाइसेंस के लिए आवेदन करते हैं तो उन पर विचार किया जाएगा और उनका शीघ्र निपटारा किया जाएगा ताकि लोग आवश्यक आवश्यकताओं से वंचित न रहें। कोर्ट ने कहा कि हम स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एएमसी को सभी अस्पतालों और/या नर्सिंग होम का दौरा करने का भी निर्देश देते हैं ताकि अस्पतालों से उत्पन्न प्रदूषण सामग्री के निपटान की विधि का पता लगाया जा सके।