सूचना मंत्री सुशांत चौधरी ने शनिवार को कहा कि त्रिपुरा सरकार ने 2018 से पांचवीं बार किसानों से धान की खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढाया है इस बार एमएसपी एक रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाया है, जिसे इसी महीने लागू किया जाएगा।

चौधरी ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता में आने के बाद धान के एमएसपी की घोषणा की और स्थानीय किसानों से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से खरीद शुरू की। 

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उन्होंने कहा कि जब पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश की चावल किस्मों के साथ प्रतिस्पर्धा में कीमत में भारी गिरावट के कारण धान की खेती करने वालों ने रुचि खो दी थी। मंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य भर में उच्च क्षमता वाली चावल मिलों को स्थापित करने के लिए निजी उद्यमियों का भी समर्थन किया है।

इससे पहले एफसीआई की शिकायत थी कि त्रिपुरा में राइस मिलें उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उनके लिए राज्य से धान खरीदना और मील के लिए दूसरे राज्यों में ले जाना मुश्किल था और इसे जनता वितरण प्रणाली के बीच लाने के लिए यहां एफसीआई स्टोर में वापस भेज दिया। 

मंत्री ने कहा, वाम मोर्चे की सरकार के दौरान धान के खेतों को ईंट भट्ठों में बदल दिया गया था, जिससे ईंट बनाने में प्रयोग में होने वाली उपजाऊ ऊपरी मिट्टी नष्ट हो गई। जिसके बाद, स्थानीय बाजार में कीमत के साथ-साथ उत्पादन में गिरावट आई थी और हजारों किसानों ने तनाव में आ गये थे।

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जिस कारण, राज्य में अशांति पैदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि वाममोर्चा सरकार 1998 से खाद्यान्न, सब्जियां, मछली, मांस और अंडा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए हर साल भावी योजनाओं की घोषणा करती थी, लेकिन वह अपने हर वादे में असफल रही। 

चौधरी ने कहा कि वह 25 वर्षों में न तो कोई निवेश ला सके और न ही उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्र या पशुपालन में आजीविका के लिए प्रेरित कर सके, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने उन्हें 57 महीनों में रास्ता दिखाया।

उन्होंने कहा कि न केवल धान के लिए, बल्कि स्थानीय उत्पादन के साथ दूध, अंडा, मांस, मछली और सब्जियों की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए त्रिपुरा सरकार भी मिशन मोड पर काम कर रही है, जिससे सालाना लगभग एक हजार करोड़ रुपये और हजारों रुपये का बहिर्वाह हो सकता है।