त्रिपुरा सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिये तदर्थ आधार पर पदोन्नति नीति 2021 घोषित कर दी है। राज्य के कानून मंत्री व कैबिनेट के प्रवक्ता रतन लाल नाथ ने यह जानकारी दी। नाथ ने यहां सिविल सचिवालय में पत्रकारों को बताया कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति 2015 से रुकी हुई है क्योंकि इस संबंध में एक मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है।

मंत्री ने कहा, 'मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया गया क्योंकि कर्मचारी बिना पदोन्नति के काम करने से मनोबल खो रहे थे।' नाथ ने कहा कि राज्य के कैबिनेट सचिव ने राज्य के विकास के हित में यह ''ऐतिहासिक निर्णय'' लिया। उनके मुताबिक नयी नीति के अनुसार तदर्थ आधार पर सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति दी जाएगी। पदोन्नति एक बार के लिये होगी, हालांकि यदि कोई कर्मचारी हकदार होगा तो उसे विभिन्न पदोन्नति का लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा, 'यदि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या सामान्य वर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति बाधित होती है, तो संबंधित विभाग वित्त विभाग की अनुमति के बिना आगे पदोन्नति कर सकता है।' नाथ ने कहा कि उच्च पदों पर पदोन्नति से निचले पदों पर रोजगार के काफी अवसर पैदा होंगे। राज्य के कानून मंत्री ने कहा, ''सभी कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए नई पदोन्नति नीति तैयार करने से पहले महाधिवक्ता और कानून, वित्त, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विभागों की राय ली गई थी।''