नई दिल्ली। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव 2013 के लिए वोटिंग हो चुकी है जिसके बाद एग्जिट पोल के नतीजे भी आ चुके हैं. हालांकि, राज्य में 2 मार्च को चुनाव के नतीजे घोषित होंगे. इस राज्य में त्रिपुरा में लेफ्ट एकबार फिर जीत की आस लगाए बैठे है तो कांग्रेस के लिए करो या मरो की स्थिति है. क्योंकि एग्जिट पोल ने लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन को तगड़ा झटका दिया दिया. इसके पीछे का कारण त्रिपुरा राजघराने के प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा हैं. इनकी पार्टी टिपरा मोथा है जो शानदार प्रदर्शन करती दिख रही है.

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भाजपा ने बदल दी थी स्थिति

आपको बता दें कि त्रिपुरा में 25 सालों तक कांग्रेस और लेफ्ट के बीच मुकाबला चलता रहा, लेकिन सत्ता लेफ्ट के पास ही रही. हालांकि, 2018 में इस स्थिति को बीजेपी ने बदल कर रख दिया था. यहां पर भाजपा और आईपीएफटी गठबंधन ने लेफ्ट को तबाह कर दिया था और बिप्लव देब के नेतृत्व में सरकार बनी. अब एकबार फिर 5 साल बाद फिर से त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव हुए हैं. भाजपा को हराने के लिए लेफ्ट और कांग्रेस एकसाथ आए हैं लेकिन इस बार भी उन्हें मात मिलती दिख रही है. क्योंकि सभी एग्जिट पोल में भाजपा की सरकार बनती दिखाई गई है.

राजा की पार्टी बन सकती है नंबर 2

इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल के अनुसार लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन को 6-11 सीट मिलती रही है. इसमें सबसे खास बात ये है कि इस चुनाव में पहली बार मैदान में उतरी टिपरा मोथा को इससे ज्यादा 9-16 सीट मिलती बताई गई है.

बीजेपी-आईपीएफटी गठबंधन को बढ़त

एग्जिट पोल के अनुमान के अनुसा त्रिपुरा की 60 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा और आईपीएफटी गठबंधन को 36-45 सीट मिल सकती हैं. इस गठबंधन को 45 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं, हालांकि ये, 2018 के 51 प्रतिशत से 6 प्रतिशत कम है. इस चुनाव के बाद एग्जिट पोल में जिस पार्टी ने सबका ध्यान खींचा है वो यहां के राजा की पार्टी टिपरा मोथा है पहली बार में ही प्रमुख विपक्षी दल बन सकती है.

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टिपरा मोथा को इतनी सीटें

त्रिपुरा के पूर्व राजा के वारिस प्रद्योत देबबर्मा ने इन चुनावों में अपनी पार्टी टिपरा मोथा को मैदान में उतारा था. इस पार्टी की प्रमुख मांग त्रिपुरा के आदिवासियों के लिए अलग टिपरालैंड प्रदेश की थी. इस चुनाव में टिपरा मोथा का मुख्य फोकस आदिवासी वोटों पर रहा, जो एग्जिट पोल के नतीजों में देखने को मिला है. टिपरा मोथा को राज्य में 9-16 सीटें मिलती बताई गई हैं.

ये रहा था 2018 में हाल

2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 36 सीटें जीती थीं, जबकि उसकी सहयोगी आईपीएफटी ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं, 25 सालों तक सत्ता में रही सीपीएम को सिर्फ 16 सीटें मिली थी. जबकि कांग्रेस का तो पत्ता ही साफ हो गया.