त्रिपुरा की एक निचली अदालत ने पत्रकार सुदीप दत्ता भौमिक की सनसनीखेज हत्या (Journalist Sudip Dutta Bhowmik murder case) के मुख्य आरोपी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तपन देववर्मा (Police Officer Tapan Devvarma) की गिरफ्तारी के लगभग चार साल बाद गुरुवार को केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) (CBI) द्वारा समय पर आरोप पत्र पेश न करने पर आरोपी को जमानत दे दी। आरोपी तपन देववर्मा के चैंबर में पत्रकार सुदीप की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी। 

मुख्य आरोपी तपन जो 21 नवंबर, 2017 को त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (Tripura State Rifles) (टीएसआर) की दूसरी बटालियन के तत्कालीन कमांडेंट थे को अगले दिन उनकी संलिप्तता के कारण पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और तब से वह पुलिस हिरासत में है। त्रिपुरा पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईअी) ने पत्रकार सुदीप हत्याकांड (Journalist Sudeep murder case) में तपन समेत चार पुलिसकर्मियों को आरोपी ठहराया। पुलिस ने तपन, उसके अंगरक्षक नदुं कमार रेयांग, राइफलमैन धर्मेन्द्र सिंह और अमित देववर्मा को हिरासत में लिया था। पत्रकारों की मांग के बाद बिप्लव कुमार देव (Biplav Kumar Dev) के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-आईपीएफटी सरकार ने मार्च 2018 में मामले को सीबीआई को सौंप दिया था। 

दो वर्ष बाद पिछले साल सितंबर में सीबीआई (CBI) ने पहले के चार आरोपियों सहित पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ निचली अदालत में प्रारंभिक आरोप पत्र दाखिल किया था। तपन के अधिवक्ता पिजुश कांती विश्वास के अनुसार सीबीआई ने अदालत को बताया कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है और शीध्र अनुपूरक आरोप पत्र पेश किया जाएगा। इस बीच उच्चतम न्यायालय ने एक आदेश में कहा कि प्रारंभिक और अंतिम आरोप पत्र की कोई अवधारणा नहीं है बल्कि यह हमेशा एक होनी चाहिए। विश्वास ने कहा कि ज्यादातर मामलों की जांच में एजेंसी 90 दिनों के भीतर आधा-अधूरा आरोप पत्र जमा करती है और जब तक कि वे अंतिम आरोप पत्र जमा नहीं कर देते आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखा जाता है। विश्वास ने कहा, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसी कर्तव्य के लिए बाध्य है। गिरफ्तारी के तीन महीने के भीतर उचित जांच के बाद पूरा आरोप पत्र जमा करें और जिसके आधार पर अदालत मुकदमे की कार्यवाही कर मामले पर अपना फैसला सुना सके।