त्रिपुरा में साल 2023 में विधानसभा के चुनाव होने हैं, लेकिन अभी से ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बीजेपी को घेरने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। गुरुवार को प्रकाश दास और सुबल भौमिक सहित अन्य नेताओं ने ऐलान किया कि वो 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने नेतृत्व में ‘जनता का महागठबंधन’ बनाने के लिए काम कर रहे हैं। 

बता दें कि करीब एक हफ्ते पहले ही त्रिपुरा में कांग्रेस के 7 वरिष्ठ नेता TMC में शामिल हो गए, जिसमें पूर्व मंत्री प्रकाश चंद्र दास, पूर्व विधायक सुबल भौमिक, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सदस्य पन्ना देब, कांग्रेस अल्पसंख्यक नेता मोहम्मद इदरीस मियां, प्रेमतोष देबनाथ और बिकाश दास शामिल हैं। तृणमूल नेता कुणाल घोष इन दिनों त्रिपुरा के दौरे पर हैं। चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी को त्रिपुरा में जीत मिलती है तो वे बंगाल में वर्तमान में लागू सभी कल्याणकारी योजनाएं यहां भी पेश करेंगे।

घोष ने गुरुवार शाम अगरतला में कहा, ‘यहां के लोग बंगाल में अन्य योजनाओं के बीच ‘कन्याश्री’, ‘रूपश्री’ और ‘स्वस्थ साथी’ के बारे में जानते हैं। उन्हें इस राज्य में भी लागू किया जाएगा, जब हम यहां ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनाएंगे। ये तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में लोगों के महागठबंधन की सरकार होगी।

तृणमूल कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को भौमिक के नेतृत्व में अगरतला में प्रदर्शन किया। उन्होंने पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के दौरे के दौरान कथित हमले के लिए जिम्मेदार दोषियों को पकड़ने के लिए पुलिस से स्पष्टीकरण की मांग की। सोमवार को त्रिपुरा में उनके काफिले पर कथित रूप से भाजपा कार्यकर्ताओं ने हमला किया था। तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उत्तर 24 परगना जिले के पानीहाटी, पूर्व वर्धमान जिले, जलपाईगुड़ी और राज्य में अन्य जगहों पर प्रदर्शन किया। जलपाईगुड़ी में उन्होंने ‘खेला होबे’ लिखी हुई टी-शर्ट पहनकर नारे लगाए और टायर जलाए।

घोष ने कहा कि गुरुवार को पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस के पास यह जानने के लिए गया था कि क्या उन्होंने बनर्जी पर हमला करने के लिए किसी अपराधी को गिरफ्तार किया है, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। ज्ञापन देने के बाद भी उन्हें डीजीपी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। बता दें कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे को अगरतला के एक होटल के कमरे में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की ‘आई-पैक’ टीम को नजरबंद कर दिया गया था। कोविड-19 पाबंदियों का हवाला देते हुए पुलिस ने इन्हें नजरबंद कर लिया था।