केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 73वीं बटालियन में तैनात शहीद उप-निरीक्षक मंगा राम देबबर्मा का पार्थिव शव शनिवार को यहां एमबीबी हवाई अड्डे पहुंचा। शहीद जवान का बेटा राजेश्वर अपने पिता के ताबूत को कंधा देते हुए बिलख बिलख कर रोने लगा। शहीद जवान के पार्थिव शव को लेने के लिए आज सुबह हवाई अड्डे पर उनका 26 वर्षीय बेटा राजेश्वर और तीन अन्य रिश्तेदारों के साथ सीआरपीएफ अधिकारी और पश्चिम त्रिपुरा के जिलाधिकारी डॉ. शैलेश कुमार यादव, लोकसभा सांसद प्रतिमा भौमिक हवाई अड्डे पर मौजूद थे। 

शहीद उपनिरीक्षक के बेटे राजेश्वर ने हवाई अड्डे में बिलखते हुए कहा, ''मैं दसवीं कक्षा पास हूँ और गांव में व्यवसाय करता है और मेरी छोटी बहन श्रीमिला बेंगलुरु में बीएससी नर्सिंग की पढाई कर रही है और छोटा भाई सुशीमी गांव के स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ रहा है। कोरोना महामारी के कारण हम सभी गांव में रहते हैं और हमारे अन्य रिश्तेदार जो बाहर काम कर रहे थे गांव लौट आए हैं। हमने घटना से एक दिन पहले पापा से बात की और उन्हें घर आने के लिए कहा। पापा ने हमें अगले महीने आने का आश्वासन दिया लेकिन आज वह बिना किसी को बताए बिना ताबूत में लाए गए हैं।''

शहीद मंगा राम लॉकडाउन हटने के कुछ दिनों बाद अपने परिवार के सदस्यों से मिले और उन्होंने कहा था कि वह गर्मियों में लम्बी छुट्टियों में रहने के लिए आएंगे। हवाई अड्डे में मौजूद शहीद के एक अन्य रिश्तेदार ने कहा, उनके परिवार के बार-बार वीआरएस लेने के अनुरोध के बावजूद वह वीआरएस लेने के लिए सहमत नहीं हुए थे। राजेश्वर ने कहा उनके पिता ने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों से कहा कि वह भाग्यशाली है कि भगवान ने उसे राष्ट्र की सेवा करने का अवसर दिया था और जब तक उनका शरीर उन्हें अनुमति देगा वह राष्ट्र की सेवा के लिए तत्पर रहेंगे। 

परिवार के सदस्यों ने पिछले साल श्रीनगर में तैनाती के बाद उन्हें वीआरएस लेने का दवाब बनाया लेकिन उन्होंने किसी की भी नहीं सुनी। हवाई अड्डे पर शहीद को श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव ने राज्य सरकार से शहीद के परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। श्री देव ने कहा, ''हमें हमेशा बहादुरों को याद रखना चाहिए और राज्य सरकार उनकी किसी भी जरूरत के लिए परिवार के साथ खड़ी है।

शहीद के पार्थिव शव को गोमती जिले के दक्षिण ताइडू में उनके पैतृक गांव रामबाबूपारा में ले जाया गया, जहां सभी पारिवारिक अनुष्ठानों और रीति-रिवाजों का पालन करते हुए शहीद का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उपनिरीक्षक मंगा राम के साथ कांस्टेबल ड्राइवर अशोक कुमार गत 25 मार्च को श्रीनगर के लवेपोरा इलाके में आतंकवादी हमले में शहीद हो गए थे।