उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने त्रिपुरा (tripura) में मुस्लिम समुदाय (Muslim community) के खिलाफ कथित तौर पर प्रायोजित हिंसा मामले में सोमवार को केंद्र और राज्य सरकार (central and state government) को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना (Justice D.Y. Chandrachud and Justice A. s. bopanna bench) की पीठ ने वकील एहतेशाम हाशमी की याचिका पर त्रिपुरा एवं केंद्र सरकार (Tripura and Central Government) को यह नोटिस जारी किया। 

याचिकाकर्ता ने त्रिपुरा में 13 से 27 अक्टूबर के दौरान हुई हिंसक घटनाओं की एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) से जांच का आदेश देने की गुहार लगाई है। स्वतंत्र, विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच की मांग करने वाली इस याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि एक साजिश के तहत मुस्लिम समुदाय से जुड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के अलावा पवित्र धर्मस्थल मस्जिद में तोड़फोड़ और आगजनी की गई तथा पुलिस प्रशासन मुक दर्शक बना रहा।

आरोप लगाए गए हैं कि तोड़फोड़ करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस ने शिकायत के बावजूद कारर्वाई नहीं की। यह भी दावा किया गया है की पुलिस ने शिकायत के बावजूद प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की, उल्टे इस घटना से संबंधित खबर लिखने वाले एक पत्रकार और अन्य आवाज उठाने वालों के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) जैसे कठोर कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

घटना संबंधित तथ्यों की सच्चाई जानने के लिए त्रिपुरा गए वकीलों एवं अन्य के एक दल के खिलाफ भी कारर्वाई की गई। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार, पुलिस और हिंसा में शामिल उपद्रवियों के बीच कथित गठजोड़ का आरोप लगाया है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी।