त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी पार्टी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) में दरार पड़ गयी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राजस्व मंत्री एन सी देबबर्मा की अध्यक्षता में राज्य समिति के पुनर्गठन के तुरंत बाद पार्टी के पूर्व निर्वाचित अध्यक्ष एवं आदिम जाति कल्याण मंत्री मेवर के. जमातिया ने  देबबर्मा की समिति की वैधता को चुनौती के लिए अदालत जाने की धमकी दी है। 

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जमातिया ने मीडिया के साथ बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि एक निहित स्वार्थी वर्ग ने अपने हितों के लिए आईपीएफटी को अस्थिर करने देबबर्मा को आगे किया है। इस समिति के पद और दस्तावेज को स्वीकार नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के सबसे वरिष्ठ राजनेता होने के नाते 88 वर्षीय  देबबर्मा की ऐसी गतिविधियां ‘सबसे दुर्भाग्यपूर्ण’ हैं और निश्चित रूप से त्रिपुरा के ‘मूल लोगों के हित’ के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सभी सामान्य सदस्यों और अग्रिम संगठनों की उपस्थिति में दो दिवसीय राज्य सम्मेलन के बाद गत तीन अप्रैल को अगले दो वर्षों के लिए प्रत्येक पद के लिए चुनाव हुआ था, जिसमें देबबर्मा हार गए थे। इसके बाद मेवाड़ की अध्यक्षता में नई समिति का गठन किया गया और पार्टी आईपीएफटी के उप-नियम के तहत कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अचानक राज्य समिति के नए सिरे से चुनाव के उनके कदम ने जमीनी स्तर पर एक बुरा संदेश दिया है और संगठन को प्रभावित किया है। 

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जमातिया ने कहा, हम एक अंतरिम सम्मेलन में नवगठित राज्य समिति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे, जिसमें निर्वाचित समिति और पार्टी संविधान को बदल दिया गया और देबबर्मा ने खुद को फिर से पार्टी का अध्यक्ष घोषित कर दिया है। आईपीएफटी पिछले 14 सालों से अनुशासित पार्टी रही है। इस तरह की कभी स्थिति सामने नहीं आई है। मैं अपने सलाहकार बोर्ड और अन्य वरिष्ठ नेताओं के समक्ष इस मुद्दे को उठाऊंगा। उन्होंने कहा कि पार्टी का निर्वाचित अध्यक्ष होने के नाते इस मुद्दे को आंतरिक रूप से हल करने का प्रयास किया गया है, लेकिन असफल होने पर अदालत जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होगा।