कुशीनगर जिले के परसहवा गांव निवासी सीआरपीएफ के जवान श्याम सुंदर प्रसाद (38) का शुक्रवार को छोटी गंडक नदी के महुआडीह घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम विदाई देते वक्त सभी की आंखें नम हो गई थीं। त्रिपुरा में तैनात इस सीआरपीएफ जवान की तबियत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 13 अप्रैल को निधन हो गया था। परसहवा गांव निवासी हरी प्रसाद के बेटे श्याम सुंदर प्रसाद सीआरपीएफ की 124 बटालियन में थे। इस वक्त उनकी तैनाती त्रिपुरा के अगरतल्ला में थी। श्याम सुंदर को ब्रेन हेमरेज के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान निधन हो गया था।


जवान के पार्थिव शरीर को सेना के विमान से बृहस्पतिवार की रात में गोरखपुर एयरपोर्ट पर ला गया। जहां से सरकारी वाहन से शहीद के शव को शुक्रवार की सुबह के लगभग छह बजे सीआरपीएफ के आईजी धर्मेंद्र सिंह विषेन जवानों के साथ गांव लेकर पहुंचे। जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोग पहुंचे। जवान के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ाकर सीआरपीएफ के अफसरों ने श्रद्धांजलि दी। जवान के पार्थिव शरीर की सुपुर्दगी उसकी नजदीकि उत्तराधिकारी पत्नी दुर्गावती देवी को दी गई।


जवान का अंतिम संस्कार छोटी गंडक नदी के महुआडीह घाट पर राजकीय सम्मान के साथ हुआ। बड़े बेटे अनमोल (7) ने नम आंखों से पिता की चिता को मुखाग्नि दी। यह देख मौजूद घाट पर लोगों के आंखें आंसू से भर आए। मुखाग्नि से पूर्व जवान के पार्थिव शरीर को आईजी की अगुवाई में सीआरपीएफ जवानों ने सलामी दी। इस मौके पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अभिषेक पांडेय, सीओ नितेश प्रताप सिंह, चौकी इंचार्ज कुशीनगर अमित कुमार राय, ग्राम प्रधान प्रेमप्रकाश दुबे, ध्रुवनरायन दुबे, मदन गोपाल दुबे, लाल बचन यादव, केशव दुबे, हरिकेश यादव, उमेश यादव समेत अनेक गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।


सीआरपीएफ के जवान श्यामसुंदर का पार्थिव शरीर जब शुक्रवार की सुबह गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। गांव में मातम का माहौल छा गया। जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अफसर भी पहुंच गए। गांव के पवन दुबे समेत अन्य लोगों ने इस दौरान मौजूद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से सैनिक की प्रतिमा लगवाने की मांग की।