बीते दिनों बांग्लादेश में दुर्गा पूजा (Durga puja) पंडालों में हुई तोड़फोड़ के विरोध में हिंदू संगठनों की रैलियों के बीच त्रिपुरा राज्य जमीयत उलमा (हिंद) ने मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब (Biplab kumar Deb) के कार्यालय को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें बीते तीन दिनों में मस्जिदों और अल्पसंख्यक बस्तियों पर हमले का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, त्रिपुरा पुलिस (Tripura police) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुछ छिटपुट घटनाएं हुई थीं, लेकिन कानून एवं व्यवस्था की कोई बड़ी घटना नहीं हुई।

अधिकारी ने अगरतला के पास मस्जिद में तोड़फोड़ (vandalism in mosque) की पुष्टि करते हुए कहा, हम लगभग 150 मस्जिदों को सुरक्षा मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे घटनाओं की जांच कर रहे हैं और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर रहे हैं। उनाकोटी के एसपी रति रंजन देबनाथ ने कहा कि वह उत्तरी त्रिपुरा जिले में एक मूर्ति के संबंध में घटना की जांच कर रहे हैं। देबनाथ ने कहा कि यह मूर्ति उनाकोटि में एक पहाड़ी के ऊपर सुनसान जगह पर थी।

उन्होंने कहा, बीते कुछ दिनों में भारी बारिश हुई है। इसकी कल्पना करना मुश्किल है कि कोई भी 45 मिनट से अधिक घने जंगलों के बीच चलकर ऐसा कुछ कर सकता है। यहां किसी तरह का सांप्रदायिक तनाव नहीं है। मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में त्रिपुरा जमीयत के अध्यक्ष मुफ्ती तैयब रहमान ने कहा कि लोगों का एक वर्ग राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द को बाधित करने की कोशिश कर रहा है।

रहमान ने बीते 22 अक्टूबर की  शाम को संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, ‘त्रिपुरा के हिंदू या मुस्लिम समुदायों में से किसी ने भी बांग्लादेश में इस जघन्य घटनाओं का समर्थन नहीं किया है। हमने भी बांग्लादेश वीजा कार्यालय में इसका विरोध किया है।’ भाजपा प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी ऐसी किसी भी घटना के खिलाफ है और अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता शांति सुनिश्चित करने के लिए राज्य के सभी लोगों तक पहुंचे हैं।

बता दें कि बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई हिंसा के विरोध में धारा 144 प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए गोमती जिले के उदयपुर में एक रैली के दौरान विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं के बीच 21 अक्टूबर को हुई झड़प में तीन पुलिसकर्मियों सहित 15 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

आयोजकों का दावा था कि उन्होंने रैली की पूर्व में मंजूरी ली थी, लेकिन जब वे अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों के पास जाने की कोशिश कर रहे थे तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया था। इस रैली का हिस्सा रहे आरएसएस के स्थानीय नेता अभिजीत चक्रबर्ती ने कहा, ‘हमें संदेह है कि कुछ लोग प्रशासन को भ्रमित करने की कोशिश की होगी कि हम कानून एवं व्यवस्था को बाधित करेंगे।’ उसी दिन बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले को लेकर उत्तरी त्रिपुरा जिले के अगरतला और धर्मनगर में व्यापक रैलियां निकाली गई थीं।

मालूम हो कि अगरतला में 21 अक्टूबर को होने वाला तीन दिवसीय बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव (Bangladesh International Film Festival) भी रद्द कर दिया गया था। अगरतला में बांग्लादेश के सहायक उच्चायुक्त मोहम्मद जोबायेद होसेन ने कहा, ‘हमने लगभग सभी तैयारियां कर ली थीं। इस बीच बांग्लादेश में असहिष्णुता की घटनाएं हुईं। हमें मिले फीडबैक और सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से मिली सूचना पर हमने विचार करते हुए फिलहाल फिल्मोत्सव को रद्द करने का फैसला किया है।’