त्रिपुरा में बर्खास्त शिक्षकों का आंदोलन जारी है। इस आंदोलन में की शिक्षकों ने अपनी नौकरी जाने के दुख में आत्महत्या कर ली है। लेकिन राज्य सरकार ने ध्यान नहीं दिया। जब आंदोलनकारी शिक्षकों ने अपनी सिर मुंडवाना शुरू किया और अनिश्चितकाल तक आंदोलन का ऐलान किया तो राज्य के शिक्षा मंत्री रतन लाल नाथ ने प्रदर्शनकारी शिक्षकों से अपना आंदोलन कार्यक्रम वापस लेने को कहा है। रतन लाल ने कहा कि ऐसा करने से उन्हें किसी भी तरह से लाभ नहीं होगा।


नाथ ने 10,323 शिक्षकों को सलाह दी, जिनकी सेवाओं को सरकारी नौकरियों के लिए साक्षात्कार के लिए तैयार किया गया था। उच्चतम न्यायालय ने इन शिक्षकों को आयु सीमा में छूट के अलावा विशेष लाभ प्रदान करने के त्रिपुरा सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। नाथ ने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के कारण, हमारी सरकार इन शिक्षकों को सरकारी नौकरी प्रदान करने के मामले में आयु में छूट के अलावा कोई विशेष सुविधा नहीं दे सकती है। हम इन बर्खास्त शिक्षकों के प्रति सहानुभूति रखते हैं, लेकिन उन्हें सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए साक्षात्कार के लिए बैठना होगा।



जानकारी के लिए बता दें कि 2017 में त्रिपुरा उच्च न्यायालय के फैसले के कारण इन शिक्षकों ने पिछले साल मार्च में अपनी नौकरी खो दी थी, जिन्होंने उनकी भर्ती प्रक्रिया को दोषपूर्ण करार दिया था। पूर्व शिक्षा मंत्री तपन चक्रवर्ती ने कहा कि उन्होंने इन आंदोलनकारी शिक्षकों के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 23 दिसंबर को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को उनके साथ बात करनी चाहिए और 35 दिनों से आंदोलन कर रहे शिक्षकों की समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।