त्रिपुरा में ब्रू शरणार्थियों के पुनर्वास के स्थायी समाधान की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई है। फिलहाल, धलाई जिले के अंबासा और लंगटराई घाटी उपखंडों में 426 परिवारों के 493 सदस्य अस्थायी शिविरों में रहेंगे। त्रिपुरा सरकार जल्द ही उनके स्थायी रहने की व्यवस्था करेगी। शिक्षा मंत्री रतन लाल नाथ ने सोमवार को ये बातें कही है।

उन्होंने कहा, ब्रू शरणार्थी आदिवासी समुदाय के हैं, इसलिए उनके पुनर्वास के लिए लंबे समय से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। स्थिति इस हद तक पहुंच गई थी कि उनकी अगली पीढ़ी की शिक्षा और स्वास्थ्य दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। इसलिए, भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन सरकार उनके स्थायी समाधान के लिए आगे आई है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में उनके पुनर्वास की व्यवस्था की गई है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्थायी पुनर्वास की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। कंचनपुर से ब्रू शरणार्थियों को धलाई जिले के अंबासा और लंगटराई घाटी उपखंडों में पुनर्वासित किया गया है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा सरकार ने आज 14 बसों में 426 परिवारों के 493 सदस्यों के पुनर्वास की व्यवस्था की है। उनके अनुसार, अंबासा सब-डिविजन में हदुकलाक पारा में 220 परिवारों के 252 लोग और लंगटराई घाटी सब-डिविजन के बंगफा पारा में 206 परिवारों के 241 ब्रू शरणार्थियों का पुनर्वास किया गया है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज से ब्रू शरणार्थियों को नए सिरे से जीने का अधिकार मिल गया है। उन्होंने उनसे दूसरों के साथ मिलकर रहने के लिए आह्वान किया है। संयोग से, त्रिपुरा दो दशकों से अधिक समय से ब्रू शरणार्थी समस्या का सामना कर रहा है। लगभग 24 साल पहले मिजोरम में हुए जातीय दंगों के बाद ब्रू जनजाति के लोगों ने त्रिपुरा में कंचनपुर और पनीसागर उपखंडों में विभिन्न शिविरों में शरण ली। मिजोरम में उनकी वापसी का प्रयास एक से अधिक बार किया गया था। लेकिन हर बार वापसी की प्रक्रिया बिफल हो गई। अंत में, त्रिपुरा में भाजपा-आईपीएफटी की सरकार बनने के बाद उनका स्थायी समाधान किया गया है।