त्रिपुरा में अगले वर्ष फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी है। राज्य के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त नीतीश कुमार व्यास और उप निर्वाचन आयुक्त आर के गुप्ता ने बुधवार को कई दौर की समीक्षा बैठक की। चुनाव से पहले राज्य की स्थिति का आकलन करने और राज्य की तैयारियों का जायजा लेने के लिए निर्वाचन आयोग (ईसीआई) का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को राज्य के दो-दिवसीय दौरे पर अगरतला पहुंचा। 

ये भी पढ़ेंः उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 29 नवंबर को जाएंगे त्रिपुरा, त्रिपुरेश्वरी मंदिर में करेंगे पूजा-अर्चना


उन्होंने राज्य में पहुंचने के तुरंत बाद सभी आठ जिलों के जिलाधिकारियों और अधीक्षकों के साथ बैठक की। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) किरण गिटे के साथ अलग से एक बैठक की और स्थिति का जायजा लिया। वे राज्य में चुनाव संबंधित कार्यों का निरीक्षण करेंगे और राज्य की राजनीतिक स्थिति के बारे में सभी हितधारकों से प्रतिक्रिया लेंगे। राज्य चुनाव प्राधिकरण पहले ही मतदाता सूची जारी कर चुका है और अब बूथ स्तर पर मतदाताओं के नामों में सुधार, जोड़ना और हटाने का काम किया जा रहा है। चुनाव आयोग पहले ही बता चुका है कि 05 जनवरी, 2023 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी, जिसके आधार पर जनवरी के दूसरे सप्ताह में 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनावों के तारीखों की घोषणा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को समय पर चुनाव कराने की अपनी मंशा से अवगत करा दिया है, जबकि विपक्षी कांग्रेस और माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी कई अवसरों पर ईसीआई से मुलाकात कर राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की मांग की है। चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ दिसंबर के अंत में राज्य का दौरा कर सकती है और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने से पहले राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों के साथ बैठक कर सकती है। 

ये भी पढ़ेंः केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक का CPM पर हमला, कहा- त्रिपुरा पर शासन करने के लिए किया हिंदू-मुस्लिम को विभाजित


माकपा चुनाव आयोग को पहले ही बता चुका है कि उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में पंजीकृत मोटरसाइकिल त्रिपुरा पहुंची है जिसका उपयोग कथित रूप से भाजपा कार्यकर्ता पिछले सभी चुनावों की तरह अगामी चुनावों में हिंसा फैलाने के लिए कर सकते हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए कदम उठाने और कार्रवाई करने की मांग की है, क्योंकि उसका आरोप है कि 2018 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से राज्य में कोई भी चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं हुआ है। कांग्रेस विधायक सुदीप रॉयबर्मान ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने हिंसा के माध्यम से लोकसभा चुनाव, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और उपचुनावों में वोट डलवाये, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को मतदान करने से रोका गया।